🌺🔱 स्वप्न मातंगी मंत्र साधना विधान 🔱🌺 (गोपनीय साधना • स्वप्न-सिद्धि • आकर्षण • वाणी-प्रभाव • अंतःदृष्टि जागरण)
✨ स्वप्न मातंगी देवी – एक दिव्य परिचय ✨
स्वप्न मातंगी महाविद्या मातंगी का एक अत्यंत रहस्यमय और शक्तिशाली स्वरूप हैं। ये साधक को स्वप्नों के माध्यम से संकेत, ज्ञान, उत्तर और मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। जिन पर स्वप्न मातंगी की कृपा होती है, उनके स्वप्न केवल कल्पना नहीं रहते, बल्कि सिद्ध संकेत और भविष्यबोध का माध्यम बन जाते हैं। यह साधना विशेष रूप से तांत्रिक, मंत्र-साधक, ज्योतिषी, लेखक, वक्ता और गूढ़ साधकों के लिए अत्यंत फलदायी मानी गई है।
🌸 स्वप्न मातंगी मंत्र (मूल मंत्र) 🌸
।। ॐ नमः स्वप्न मातंगिनि सत्यभाषिणि स्वप्नं दर्शय दर्शय स्वाहा ।। ⚜️⚜️लौकिक मंत्र ⚜️⚜️ ॐ ह्रीं ऐं स्वप्न मातंग्यै नमः॥ 👉 यह मंत्र स्वप्नों को जागृत करने, देवी से संवाद और अंतःकरण को सूक्ष्म बनाने में सहायक है।
🔱⚜️ मंत्र की महिमा⚜️ 🔱 📿 यह मंत्र साधक को • दिव्य स्वप्न • संकेतात्मक उत्तर • वाणी में आकर्षण • अंतर्ज्ञान की तीव्रता • गुप्त ज्ञान की प्राप्ति प्रदान करता है। कहा जाता है – “जहाँ स्वप्न मातंगी प्रकट होती हैं, वहाँ अज्ञान का अंधकार स्वयं मिट जाता है।” मंत्र साधना विधि मातंगी देवी का मंत्र सिद्ध यँत्र माला ले कर हीं साधना करनी चाहिए। सर्वप्रथम यँत्र स्थापना करें उस के बाद गंगा जल से स्नान कर धुप दीप लगा कर प्राम्भ करें।
⚜️🕉️ विनियोग 🕉️⚜️ ॐ अस्य श्री स्वप्न मातंगी मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्री छन्दः स्वप्न मातंगी देवता ह्रीं बीजम् ऐं शक्तिः नमः कीलकम्। स्वप्न-सिद्धि, ज्ञान-प्राप्ति, आकर्षण एवं वाणी-प्रभाव सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः॥
,⚜️⚜️🌺 ध्यान मंत्र 🌺⚜️⚜️ रक्तवर्णां त्रिनेत्रां मातंगी स्वप्नरूपिणीम्। वीणापुस्तकहस्तां च ध्यायेत् स्वप्ने प्रबोधिनीम्॥ 👉 साधक कल्पना करे कि देवी नील-रक्त आभा से युक्त हैं, वीणा धारण किए हुए, और स्वप्न में प्रकट होकर संकेत दे रही हैं। ⚜️🔥 साधना संकल्प 🔥⚜️ मम सर्वस्वप्न-सिद्धि-ज्ञान-प्राप्त्यर्थं स्वप्न मातंगी प्रसाद सिद्ध्यर्थं अहं एतत् मंत्र जपं करिष्ये॥
⚜️📿 जप विधान 📿⚜️ 🔢 जप संख्या – 11,000 / 21,000 (विशेष सिद्धि हेतु 1,25,000) ⏰ समय – रात्रि 10 बजे के बाद या ब्रह्ममुहूर्त
⚜️ आसन – काला ऊन, कुश या लाल वस्त्र 📿 माला – रुद्राक्ष या स्फटिक (विशेष: नील माला)
⚜️🌙 साधना की विशेष विधि ⚜️🌙 ✔ साधना से पूर्व मौन धारण करें ✔ जप के बाद बिना किसी से बात किए सो जाएँ ✔ शयन से पूर्व देवी से प्रश्न मन में रखें ✔ स्वप्न को प्रातः लिख लें
🍃 आहार-विहार नियम 🍃 ✔ सात्त्विक भोजन✔ अल्पाहार ✔ रात्रि में फल या दूध ❌ मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज निषिद्ध
⚠️ सावधानियाँ ⚠️ 🔺 यह साधना गोपनीय रखें 🔺 मंत्र का उपहास न करें 🔺 श्रद्धा और विश्वास अनिवार्य है 🔺 गुरु मार्गदर्शन में करना सर्वोत्तम
🌟 साधना फल एवं उपयोगिता 🌟 ✨ स्वप्न में देवी दर्शन✨ भविष्य संकेत ✨ निर्णय क्षमता में वृद्धि✨ वाणी में आकर्षण ✨ गुप्त विद्याओं में प्रगति 🙏 जो साधक श्रद्धा, संयम और विश्वास से इस साधना को करता है, स्वप्न मातंगी स्वयं मार्गदर्शक बनकर प्रकट होती हैं। 🌺✨ यदि यह दिव्य साधना-विधान आपको उपयोगी लगा हो तो 🙏 लाइक करें | ✍️ कमेंट करें | ✨🔱 जय स्वप्न मातंगी 🔱✨ Contact for Mantra sidh yantra mala diksha hawan.
🌺🔱 स्वप्न मातंगी मंत्र साधना विधान 🔱🌺(गोपनीय साधना • स्वप्न-सिद्धि • आकर्षण • वाणी-प्रभाव • अंतःदृष्टि जागरण) ✨ स्वप्न मातंगी देवी – एक दिव्य परिचय ✨ स्वप्न मातंगी महाविद्या मातंगी का एक अत्यंत रहस्यमय और शक्तिशाली स्वरूप हैं। ये … Continue reading स्वप्न मातंगी मंत्र साधना→
माँ मातंगी: मौन से वाणी के सिंहासन तक तांत्रिक ज्ञान आगम और शास्त्र एक गहन सत्य प्रकट करते हैं: वाणी मात्र ध्वनि नहीं, बल्कि चेतना का कंपन है। यह अव्यक्त और प्रकट, मौन परम सत्ता और जीवंत जगत के … Continue reading मातंगी मंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना :- 1-महाविद्या मातंगी, महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। देवी निम्न वर्ग एवं जनजातिओ से सम्बंधित हैं। देवी का एक अन्य नाम उच्छिष्ट चांडालिनी भी हैं। देवी तंत्र क्रियाओं की अधिष्ठात्री हैं। इंद्रजाल या जादुई … Continue reading मातंगी सम्मोहन मंत्र साधना→
महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच सभी के लिए उपयोगी होता है। मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या। वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं। यह सरस्वती का ही प्रखर रूप … Continue reading मातंगी देवी यन्त्र -ताबीज -कवच→
मातंगी Matangi Devi Mantra Sadhana साधना विधि यह साधना मातंगी जयन्ती, मातंगी सिद्धि दिवस अथवा किसी भी सोमवार के दिन से शुरू की जा सकती है। यह साधना रात्रिकालीन है और इसे रात्रि में ९ बजे के बाद शुरु … Continue reading मातंगी तंत्र मंत्र यंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना वर्तमान युग में, मानव जीवन के प्रारंभिक पड़ाव से अंतिम पड़ाव तक भौतिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है । व्यक्ति जब तक भौतिक जीवन का पूर्णता से निर्वाह नहीं कर लेता है, तब … Continue reading मातंगी साधना Matangi Mantra→
तेल मातंगी प्रयोग (भूत-भविष्य दर्शन साधना) मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर चंद्र इनके तीन नेत्र हैं और यह रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान … Continue reading तेल मांतगी भूत भविष्य दर्शन मंत्र→
Matangi Devi Haven yagha 🔥 विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे। फल- मधुयुक्त महुए के … Continue reading मातंगी हवन 🔥 yagha→
मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। मनुष्यों को सर्व-सिद्धि-प्रददिव्य मातंगी-कवच अति उत्तम है, उस कवच को मुझसे कहिए। श्री ईश्वर उवाच श्रृणु देवि। प्रवक्ष्यामि, मातंगी-कवचं … Continue reading मातंगी कवच→
मातंगी देवी तंत्र मंत्र साधना हवन Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग भैरवी मंत्र साधना छिन्नमस्ता … Continue reading मातंगी Matangi Devi video→
तांत्रिक ज्ञान आगम और शास्त्र एक गहन सत्य प्रकट करते हैं: वाणी मात्र ध्वनि नहीं, बल्कि चेतना का कंपन है। यह अव्यक्त और प्रकट, मौन परम सत्ता और जीवंत जगत के बीच आदिम सेतु है।
इसी रहस्यमय ढाँचे में, शाक्त तंत्र, विशेषकर आदरणीय तंत्रराज तंत्र और शारदा तिलक, वाक के चार रूपों – परा, पश्यंती, मध्यमा और वैखरी – के अवतरण को प्रकाशित करते हैं। यह पवित्र चक्र हृदय की प्रकाशमान शांति से लेकर वास्तविकता को बदलने वाले शब्द तक, विचार की यात्रा का वर्णन करता है।
माँ मातंगी वागीश्वरी के रूप में, वाणी की साम्राज्ञी।
1) जीभ पर एक अक्षर बनने से पहले ही, वे कंपन उत्पन्न करती हैं। शुद्ध चेतना (चित) की अथाह शांति में, वह परावाक के रूप में कांपती है, जो अनाहत में स्थित सर्वोच्च, अविभेदित ध्वनि क्षमता है।
2) जब चेतना इरादे की ओर संकुचित होती है, तो वे पश्यंती, यानी “द्रष्टा” के रूप में प्रकट होती हैं, जहाँ सत्य सर्वप्रथम एक सहज दृष्टि, एक शब्दहीन ज्ञान के रूप में प्रकट होता है। अंतर्मुखी होकर।
3) वे मध्यमा बन जाती हैं, जो संरचित मानसिक संवाद, अर्थ बुनने वाली विचार की सूक्ष्म ध्वनि है।
4) अंत में, श्वास और शरीर से जीवंत होकर, वे वैखरी के रूप में बाह्य रूप धारण करती हैं, जो श्रव्य, सुगठित वाणी है जिसमें आशीर्वाद देने या नष्ट करने, मुक्त करने या बांधने की शक्ति है।
तंत्रराज तंत्र के अनुसार, माँ मातंगी वह चेतन शक्ति हैं जो इन सभी लोकों में सहजता से विचरण करती हैं, शब्द की दिव्य सारथी हैं। जहाँ वैदिक सरस्वती बुद्धि की पवित्रता और सुसंस्कृत अभिव्यक्ति की कृपा प्रदान करती हैं, वहीं तंत्र माँ मातंगी को एक अधिक मौलिक और परिवर्तनकारी शक्ति जो , वाक सिद्धि के स्रोत के रूप में प्रकट होती है।
वह मंत्र शक्ति से वीर्य को भी ऊर्जावान बना कर , मंत्र की प्रबल प्रभावकारिता प्रदान करती हैं, जहाँ उच्चारण वर्णन नहीं बल्कि आदेश बन जाता है।
उनकी गरिमा भरी ऊर्जा वाणी को एक रचनात्मक, यहाँ तक कि विनाशकारी शक्ति दोनों में बदल सकती है, जो नियति को आकर्षित करने, मानसिक परिदृश्यों को पुनर्व्यवस्थित करने और मूर्त दुनिया को आकार देने में सक्षम है।
उनकी खोज में, अनेक लोग सांसारिक पराक्रम, त्रुटिहीन कला, सम्मोहक संगीत और प्रभावशाली वाणी की प्राप्ति करते हैं।
परन्तु तंत्र इससे कहीं अधिक गहरे वरदान की ओर संकेत करता है। ये उपलब्धियाँ तो उनके सच्चे वरदान, परम सामंजस्य के वृक्ष पर खिले सुगंधित फूल मात्र हैं।
माँ मातंगी की सबसे गहन दीक्षा आंतरिक सत्य और बाह्य अभिव्यक्ति के बीच की खाई को पाटना है।
वे मनस (मन), भाव (भावना), वाक (वाणी) और क्रिया (कर्म) को एक विलक्षण, प्रतिध्वनित आवृत्ति में संरेखित करती हैं। उनके प्रभुत्व में, व्यक्ति का संपूर्ण अस्तित्व एक साकार मंत्र बन जाता है, और जीवन स्वयं जागृत स्पष्टता के निरंतर, प्रामाणिक पाठ में रूपांतरित हो जाता है।
इस प्रकार, माँ मातंगी तंत्र के केंद्र में स्थित मौन क्रांति हैं:
· वह रसायनज्ञ हैं जो लज्जा को शक्ति में रूपांतरित करती हैं, वह समाज द्वारा त्यागी गई चीजों को पवित्रता अर्पण करती हैं।
वह संप्रभु हैं जो मौन को शक्ति में परिवर्तित करती हैं, वाणी को मात्र प्रदर्शन नहीं, बल्कि जागृति का साधन बनाती हैं। · वह वह दिव्यदर्शी हैं जो समाज से बहिष्कृत लोगों को सिंहासन पर बिठाती हैं, और उन आवाज़ों को बुलंद करती हैं जिन्हें दुनिया ने मिटाने की कोशिश की थी।
उनके मार्गदर्शन में, हम मौन से संप्रभुता की ओर बढ़ते हैं, और यह पाते हैं कि हमारी सबसे प्रामाणिक आवाज़ ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। जो मातंगी हमें प्रदान करती हैं।
मातंगी देवी: देवी मातंगी के आशीर्वाद से उत्पन्न प्रतिभा की ओर सम्मोहक आकर्षण, वाणी, संगीत, कला और रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से प्रकट होने वाली दिव्य बुद्धि की जागृति को दर्शाता है। परिष्कृत ज्ञान और आंतरिक बुद्धि की महाविद्या के रूप में, मातंगी एक सहज आकर्षण प्रदान करती हैं जो दिखावे से नहीं, बल्कि प्रामाणिकता और गहराई से ध्यान आकर्षित करता है। उनकी कृपा अंतर्ज्ञान को तीव्र करती है, अभिव्यक्ति को समृद्ध करती है और विचार को ध्वनि के साथ संरेखित करती है, जिससे प्रतिभा स्वाभाविक रूप से और शक्तिशाली रूप से प्रवाहित होती है। उनके आशीर्वाद से प्रभावित लोग अक्सर अनजाने में दूसरों को प्रेरित करते हैं, क्योंकि उनके शब्द, संगीत या रचनात्मकता में एक सूक्ष्म आध्यात्मिक प्रतिध्वनि होती है। यह आकर्षण अहंकार में निहित नहीं है, बल्कि सामाजिक सीमाओं से परे आंतरिक सत्य के साथ संरेखण में निहित है। देवी मातंगी के आशीर्वाद से, प्रतिभा चुंबकीय हो जाती है, और रचनात्मकता दिव्य चेतना की एक जीवंत अभिव्यक्ति में रूपांतरित हो जाती है जो हृदयों को मोहित करती है और जागरूकता को उन्नत करती है। मातंगी साधना – वाक सिद्धि, दाम्पत्य सुख, तंत्र, धन, एवं मोक्ष नवम महाविद्या : देवी मातंगी सिद्धि प्रयोग नोट- यह प्रयोग सिर्फ जो साधक साधना करना चाहते उन के लिए जानकारी के लिए दिया जा रहा है कोई भी साधक सिद्धि करने से पहले योग्य तांत्रिक गुरु जी से मंत्र सिद्ध समाग्री ले कर निर्देशन लेने के बाद ही करें अन्यथा नुकसानदायक भी हो सकता है जो साधक स्वयं का जिम्मेदार होगा।
महाविद्याओं में नौवीं देवी मातंगी, उत्कृष्ट तंत्र ज्ञान से सम्पन्न, कला और संगीत पर महारत प्रदान करने वाली देवी हैं। देवी मातंगी दस महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। तंत्र शास्त्रों के अनुसार देवी के प्रादुर्भाव वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। देवी मातङ्गी वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं। यह सरस्वती ही हैं और वाणी , संगीत ,ज्ञान , विज्ञान ,सम्मोहन ,वशीकरण ,मोहन की अधिष्ठात्री हैं। त्रिपुरा ,काली और मातंगी का स्वरुप लगभग एक सा है। यद्यपि अन्य महाविद्याओं से भी वशीकरण , मोहन ,आकर्षण के कर्म होते हैं और संभव हैं किन्तु इस क्षेत्र का आधिपत्य मातंगी [सरस्वती] को प्राप्त हैं देवी, केवल मात्र वचन द्वारा त्रिभुवन में समस्त प्राणियों तथा अपने घोर शत्रु को भी वश करने में समर्थ हैं, जिसे सम्मोहन क्रिया कहा जाता हैं, देवी सम्मोहन विद्या एवं वाणी की अधिष्ठात्री हैं। यह जितनी समग्रता ,पूर्णता से इस कार्य को कर सकती हैं कोई अन्य नहीं क्योकि सभी अन्य की अवधारणा अन्य विशिष्ट गुणों के साथ हुई है। उन्हें वशीकरण ,मोहन के कर्म हेतु अपने मूल गुण के साथ अलग कार्य करना होगा जबकि मातंगी वशीकरण ,मोहन की देवी ही हैं अतः यह आसानी से यह कार्य कर देती हैं। देवी उच्छिष्ट चांडालिनी या महा-पिशाचिनी से भी देवी विख्यात हैं तथा देवी का सम्बन्ध नाना प्रकार के तंत्र क्रियाओं, विद्याओं से हैं। इंद्रजाल विद्या या जादुई शक्ति में देवी पारंगत हैं साथ ही वाक् सिद्धि, संगीत तथा अन्य ललित कलाओं में निपुण हैं, नाना सिद्ध विद्याओं से सम्बंधित हैं; देवी तंत्र विद्या में पारंगत हैं। देवी का सम्बन्ध प्रकृति, पशु, पक्षी, जंगल, वन, शिकार इत्यादि से हैं, जंगल में वास करने वाले आदिवासी-जनजातियों सेदेवी मातंगी अत्यधिक पूजिता हैं। निम्न तथा जन जाती द्वारा प्रयोग की जाने वाली नाना प्रकार की परा-अपरा विद्या देवी द्वारा ही उन्हें प्रदत्त है देवी मातंगी, मतंग मुनि के पुत्री के रूप से भी जानी जाती हैं। देवी का घनिष्ठ सम्बन्ध उच्छिष्ट भोजन पदार्थों से हैं, परिणामस्वरूप देवी, उच्छिष्ट चांडालिनी के नाम से विख्यात हैं, देवी की आराधना हेतु उपवास की आवश्यकता नहीं होती हैं। देवी की आराधना हेतु उच्छिष्ट सामाग्रीयों की आवश्यकता होती हैं क्योंकि देवी की उत्पत्ति शिव तथा पार्वती के उच्छिष्ट भोजन से हुई थी। देवी की आराधना सर्वप्रथम भगवान विष्णु द्वारा की गई, माना जाता हैं तभी से वे सुखी, सम्पन्न, श्री युक्त तथा उच्च पद पर विराजित हैं। देवी की आराधना बौद्ध धर्म में भी की जाती हैं, किन्तु बौद्ध धर्म के प्रारंभ में देवी का कोई अस्तित्व नहीं था। कालांतर में देवी बौद्ध धर्म में मातागिरी नाम से जानी जाने लगी। ऐसा माना जाता हैं कि देवी की ही कृपा से वैवाहिक जीवन सुखमय होता हैं, देवी ग्रहस्त के समस्त कष्टों का निवारण करती हैं। देवी की उत्पत्ति शिव तथा पार्वती के प्रेम से हुई है देवी मातंगी का सम्बन्ध मृत शरीर या शव तथा श्मशान भूमि से हैं। देवी अपने दाहिने हाथ पर महा-शंख (मनुष्य खोपड़ी) या खोपड़ी से निर्मित खप्पर, धारण करती हैं। पारलौकिक या इंद्रजाल, मायाजाल से सम्बंधित रखने वाले सभी देवी-देवता श्मशान, शव, चिता, चिता-भस्म, हड्डी इत्यादि से सम्बंधित हैं, पारलौकिक शक्तियों का वास मुख्यतः इन्हीं स्थानों पर हैं। तंत्रो या तंत्र विद्या के अनुसार देवी तांत्रिक सरस्वतीनाम से जानी जाती हैं एवं श्री विद्या महा त्रिपुरसुंदरीके रथ की सारथी तथा मुख्य सलाहकार हैं। मातंगी देवी का मंत्र सिद्ध यँत्र स्थापना कर के हीं मंत्र जाप करें।
देवी मातंगी का शारीरिक वर्ण गहरे नीले रंग या श्याम वर्ण का है, अपने मस्तक पर देवी अर्ध चन्द्र धारण करती हैं तथा देवी तीन नशीले नेत्रों से युक्त हैं। देवी अमूल्य रत्नों से युक्त रत्नमय सिंहासन पर बैठी हैं एवं नाना प्रकार के मुक्ता-भूषण से सुसज्जित हैं, जो उनकी शोभा बड़ा रहीं हैं। कहीं-कहीं देवी! कमल के आसन तथा शव पर भी विराजमान हैं। देवी मातंगी गुंजा के बीजों की माला धारण करती हैं, लाल रंग के आभूषण देवी को प्रिय हैं तथा सामान्यतः लाल रंग के ही वस्त्र-आभूषण इत्यादि धारण करती हैं। देवी सोलह वर्ष की एक युवती जैसी स्वरूप धारण करती हैं जिनकी शारीरिक गठन पूर्ण तथा मनमोहक हैं। देवी चार हाथों से युक्त हैं, इन्होंने अपने दायें हाथों में वीणा तथा मानव खोपड़ी धारण कर रखी हैं तथा बायें हाथों में खड़ग धारण करती हैं एवं अभय मुद्रा प्रदर्शित करती हैं। इनके आस पास पशु-पक्षियों को देखा जा सकता हैं, सामान्यतः तोते इनके साथ रहते हैं। देवी मातंगी के प्रादुर्भाव से सम्बंधित कथा। कथा(१) शक्ति संगम तंत्र के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और उनकी पत्नी लक्ष्मी जी,भगवान शिव तथा पार्वती से मिलने हेतु उनके निवास स्थानकैलाश शिखर पर गये। भगवान विष्णु अपने साथ कुछ खाने की सामग्री ले गए तथा उन्होंने वह खाद्य प्रदार्थ शिव जी को भेट स्वरूप प्रदान की।भगवान शिव तथा पार्वती ने, उपहार स्वरूप प्राप्त हुए वस्तुओं को खाया, भोजन करते हुए खाने का कुछ अंश नीचे धरती पर गिरे; उन गिरे हुए भोजन के भागों से एक श्याम वर्ण वाली देवी ने जन्म लिया, जो मातंगी नाम से विख्यात हुई। देवी का प्रादुर्भाव उच्छिष्ट भोजन से हुआ, परिणामस्वरूप देवी का सम्बन्ध उच्छिष्ट भोजन सामग्रियों से हैं तथा उच्छिष्ट वस्तुओं से देवी की आराधना होती हैं। देवी उच्छिष्ट मातंगी नाम से जानी जाती हैं। कथा(२) प्राणतोषिनी तंत्र के अनुसार, एक बार पार्वती देवी ने, अपने पति भगवान शिव से अपने पिता हिमालय राज के यहाँ जाकर, अपने माता तथा पिता से मिलने की अनुमति मांगी। परन्तु, भगवान शिव नहीं चाहते थे की वे उन्हें अकेले छोड़ कर जाये। भगवान शिव के सनमुख बार-बार प्रार्थना करने पर, उन्होंने देवी को अपने पिता हिमालय राज के यहाँ जाने की अनुमति दे दी। साथ ही उन्होंने एक शर्त भी रखी कि! वे शीघ्र ही माता-पिता से मिलकर वापस कैलाश आ जाएगी। तदनंतर, अपनी पुत्री पार्वती को कैलाश से लेन हेतु, उनकी माता मेनका ने एक बगुला वाहन स्वरूप भेजा। कुछ दिन पश्चात भगवान शिव, बिन पार्वती के विरक्त हो गए तथा उन्हें वापस लाने का उपाय सोचने लगे; उन्होंने अपना भेष एक आभूषण के व्यापारी के रूप में बदला तथाहिमालय राज के घर गए। देवी इस भेष में देवी पार्वती की परीक्षा लेना चाहते थे, वे पार्वती के सनमुख गए और अपनी इच्छा अनुसार आभूषणों का चुनाव करने के लिया कहा। पार्वती ने जब कुछ आभूषणों का चुनाव कर लिया तथा उनसे मूल्य ज्ञात करना चाहा! व्यापारी रूपी भगवान शिव ने देवी से आभूषणों के मूल्य के बदले, उनसे सम्मोह की इच्छा प्रकट की। देवी पार्वती अत्यंत क्रोधित हुई अंततः उन्होंने अपनी अलौकिक शक्तिओं से उन्होंने पहचान ही लिया। तदनंतर देवी सम्भोग हेतु तैयार हो गई तथा व्यापारी से कुछ दिनों पश्चात आने का निवेदन किय कुछ दिनों पश्चात देवी पार्वती भी भेष बदल कर,भगवान शिव के समुंख कैलाश पर्वत पर गई।भगवान शिव अपने नित्य संध्योपासना के तैयारी कर रहे थे। देवी पार्वती लाल वस्त्र धारण किये हुए, बड़ी-बड़ी आँखें कर, श्याम वर्ण तथा दुबले शरीर से युक्त अपने पति के सनमुख प्रकट हुई।भगवान शिव ने देवी से उनका परिचय पूछा, देवी ने उत्तर दिया कि वह एक चांडाल की कन्या हैं तथा तपस्या करने आई हैं। भगवान शिव ने देवी को पहचान लिया तथा कहाँ! वे तपस्वी को तपस्या का फल प्रदान करने वाले हैं। यह कहते हुए उन्होंने देवी का हाथ पकड़ लिया और प्रेम में मग्न हो गए। तत्पश्चात, देवी ने भगवान शिव से वार देने का निवेदन किया; भगवान शिव ने उनके इसी रूप को चांडालिनी वर्ण से अवस्थित होने का आशीर्वाद प्रदान किया तथा कई अलौकिक शक्तियां प्रदान की।
देवी मातंगी के सन्दर्भ में अन्य तथ्य:- देवी हिन्दू समाज के सर्व निम्न जाती चांडाल या डोमसे सम्बद्ध हैं, देवी चांडालिनी हैं तथा भगवान शिव चांडाल। (चांडाल श्मशान में शव दाह से सम्बंधित कार्य करते हैं)। तंत्र शास्त्र में देवी की उपासना विशेषकर वाक् सिद्धि (जो बोला जाये वही सिद्ध होना) हेतु, पुरुषार्थ सिद्धि तथा भोग-विलास में पारंगत होने हेतु की जाती हैं। देवी मातंगी चौंसठ प्रकार के ललित कलाओं से सम्बंधित विद्याओं में निपुण हैं तथा तोता पक्षी इनके बहुत निकट हैं। नारदपंचरात्र के अनुसार, कैलाशपति भगवान शिवको चांडाल तथा देवी शिवा को ही उछिष्ट चांडालिनी कहा गया हैं। एक बार मतंग मुनि ने सभी जीवों को वश में करने के उद्देश्य से, नाना प्रकार के वृक्षों से परिपूर्ण वन में देवी श्री विद्या त्रिपुरा की आराधना की। मतंग मुनि के कठिन साधना से संतुष्ट हो देवी त्रिपुरसुंदरी ने अपने नेत्रों से एक श्याम वर्ण की सुन्दर कन्या का रूप धारण किया; उन्हें राज मातंगी कहा गया जो देवी मातंगी का ही एक स्वरूप हैं। देवी, मतंग कन्या के नाम से भी जानी जाती हैं कारणवश इन्हें मातंगी नाम से जाना जाता हैं। देवी के सनमुख बैठा तोता ह्रीं मन्त्र का उच्चारण करता है, जो बीजाक्षर हैं। कमल सृष्टि का, शंख पात्र ब्रह्मरंध, मधु अमृत, शुक या तोता शिक्षा का प्रतिक हैं। रति, प्रीति, मनोभाव, क्रिया, शुधा, अनंग कुसुम, अनंग मदन तथा मदन लसा, देवी मातंगी की आठ शक्तियां हैं। देवी के स्वरूप। एवं सम्बन्धित जानकारी :- भगवती मातंगी के कई नाम हैं। इनमें प्रमुख हैं-
१.सुमुखी, २.लघुश्यामा या श्यामला, ३.उच्छिष्टचांडालिनी, ४.उच्छिष्टमातंगी, ५.राजमातंगी, ६.कर्णमातंगी, ७.चंडमातंगी, ८.वश्यमातंगी, ९.मातंगेश्वरी, १०.ज्येष्ठमातंगी, ११.सारिकांबा, १२.रत्नांबा मातंगी एवं १३.वर्ताली मातंगी। भैरव : मतंग कुल : श्री कुल। दिशा : वायव्य कोण। स्वभाव : सौम्य स्वभा कार्य : सम्मोहन एवं वशीकरण, तंत्र विद्या पारंगत, संगीत तथा ललित कला निपुण। शारीरिक वर्ण : काला या गहरा नीला। मातङ्गी कवच ।। श्रीदेव्युवाच ।। साधु-साधु महादेव ! कथयस्व सुरेश्वर ! मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ।। श्री ईश्वर उवाच ।। श्रृणु देवि ! प्रवक्ष्यामि, मातंगी-कवचं शुभं । गोपनीयं महा-देवि ! मौनी जापं समाचरेत् ।। विनियोगः- ॐ अस्य श्रीमातंगी-कवचस्य श्री दक्षिणा-मूर्तिः ऋषिः । विराट् छन्दः । श्रीमातंगी देवता । चतुर्वर्ग-सिद्धये जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- श्री दक्षिणा-मूर्तिः ऋषये नमः शिरसि । विराट् छन्दसे नमः मुखे । श्रीमातंगी देवतायै नमः हृदि । चतुर्वर्ग-सिद्धये जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे । कवच ।। ॐ शिरो मातंगिनी पातु, भुवनेशी तु चक्षुषी । तोडला कर्ण-युगलं, त्रिपुरा वदनं मम ।। पातु कण्ठे महा-माया, हृदि माहेश्वरी तथा । त्रि-पुष्पा पार्श्वयोः पातु, गुदे कामेश्वरी मम ।। ऊरु-द्वये तथा चण्डी, जंघयोश्च हर-प्रिया । महा-माया माद-युग्मे, सर्वांगेषु कुलेश्वरी ।। अंग प्रत्यंगकं चैव, सदा रक्षतु वैष्णवी । ब्रह्म-रन्घ्रे सदा रक्षेन्, मातंगी नाम-संस्थिता ।। रक्षेन्नित्यं ललाटे सा, महा-पिशाचिनीति च । नेत्रयोः सुमुखी रक्षेत्, देवी रक्षतु नासिकाम् ।। महा-पिशाचिनी पायान्मुखे रक्षतु सर्वदा । लज्जा रक्षतु मां दन्तान्, चोष्ठौ सम्मार्जनी-करा ।। चिबुके कण्ठ-देशे च, ठ-कार-त्रितयं पुनः । स-विसर्ग महा-देवि ! हृदयं पातु सर्वदा ।। नाभि रक्षतु मां लोला, कालिकाऽवत् लोचने । उदरे पातु चामुण्डा, लिंगे कात्यायनी तथा ।। उग्र-तारा गुदे पातु, पादौ रक्षतु चाम्बिका । भुजौ रक्षतु शर्वाणी, हृदयं चण्ड-भूषणा ।। जिह्वायां मातृका रक्षेत्, पूर्वे रक्षतु पुष्टिका । विजया दक्षिणे पातु, मेधा रक्षतु वारुणे ।। नैर्ऋत्यां सु-दया रक्षेत्, वायव्यां पातु लक्ष्मणा । ऐशान्यां रक्षेन्मां देवी, मातंगी शुभकारिणी । रक्षेत् सुरेशी चाग्नेये, बगला पातु चोत्तरे । ऊर्घ्वं पातु महा-देवि ! देवानां हित-कारिणी ।। पाताले पातु मां नित्यं, वशिनी विश्व-रुपिणी । प्रणवं च ततो माया, काम-वीजं च कूर्चकं ।। मातंगिनी ङे-युताऽस्त्रं, वह्नि-जायाऽवधिर्पुनः । सार्द्धेकादश-वर्णा सा, सर्वत्र पातु मां सदा ।। श्रीमातङ्गीअष्टोत्तरशतनामावली ।। श्रीमहामत्तमातङ्गिन्यै नमः । श्रीसिद्धिरूपायै नमः । श्रीयोगिन्यै नमः । श्रीभद्रकाल्यै नमः । श्रीरमायै नमः । श्रीभवान्यै नमः । श्रीभयप्रीतिदायै नमः । श्रीभूतियुक्तायै नमः । श्रीभवाराधितायै नमः । श्रीभूतिसम्पत्तिकर्यै नमः । १०। श्रीजनाधीशमात्रे नमः । श्रीधनागारदृष्ट्यै नमः । श्रीधनेशार्चितायै नमः । श्रीधीवरायै नमः । श्रीधीवराङ्ग्यै नमः । श्रीप्रकृष्टायै नमः । श्रीप्रभारूपिण्यै नमः । श्रीकामरूपायै नमः । श्रीप्रहृष्टायै नमः । श्रीमहाकीर्तिदायै नमः । २०। श्रीकर्णनाल्यै नमः । श्रीकाल्यै नमः । श्रीभगाघोररूपायै नमः । श्रीभगाङ्ग्यै नमः । श्रीभगावाह्यै नमः । श्रीभगप्रीतिदायै नमः । श्रीभिमरूपायै नमः । श्रीभवानीमहाकौशिक्यै नमः । श्रीकोशपूर्णायै नमः । श्रीकिशोर्यै नमः । ३०। श्रीकिशोरप्रियानन्दईहायै नमः । श्रीमहाकारणायै नमः । श्रीकारणायै नमः । श्रीकर्मशीलायै नमः । श्रीकपाल्यै नमः । श्रीप्रसिद्धायै नमः । श्रीमहासिद्धखण्डायै नमः । श्रीमकारप्रियायै नमः । श्रीमानरूपायै नमः । श्रीमहेश्यै नमः । ४०। श्रीमहोल्लासिन्यै नमः । श्रीलास्यलीलालयाङ्ग्यै नमः । श्रीक्षमायै नमः । श्रीक्षेमशीलायै नमः । श्रीक्षपाकारिण्यै नमः । श्रीअक्षयप्रीतिदाभूतियुक्ताभवान्यै नमः । श्रीभवाराधिताभूतिसत्यात्मिकायै नमः । श्रीप्रभोद्भासितायै नमः । श्रीभानुभास्वत्करायै नमः । श्रीचलत्कुण्डलायै नमः । ५०। श्रीकामिनीकान्तयुक्तायै नमः । श्रीकपालाऽचलायै नमः । श्रीकालकोद्धारिण्यै नमः । श्रीकदम्बप्रियायै नमः । श्रीकोटर्यै नमः । श्रीकोटदेहायै नमः । श्रीक्रमायै नमः । श्रीकीर्तिदायै नमः । श्रीकर्णरूपायै नमः । श्रीकाक्ष्म्यै नमः । ६०। श्रीक्षमाङ्यै नमः । श्रीक्षयप्रेमरूपायै नमः । श्रीक्षपायै नमः । श्रीक्षयाक्षायै नमः । श्रीक्षयाह्वायै नमः । श्रीक्षयप्रान्तरायै नमः । श्रीक्षवत्कामिन्यै नमः । श्रीक्षारिण्यै नमः । श्रीक्षीरपूषायै नमः । श्रीशिवाङ्ग्यै नमः । ७०। श्रीशाकम्भर्यै नमः । श्रीशाकदेहायै नमः । श्रीमहाशाकयज्ञायै नमः । श्रीफलप्राशकायै नमः । श्रीशकाह्वाशकाख्याशकायै नमः । श्रीशकाक्षान्तरोषायै नमः । श्रीसुरोषायै नमः । श्रीसुरेखायै नमः । श्रीमहाशेषयज्ञोपवीतप्रियायै नमः । श्रीजयन्तीजयाजाग्रतीयोग्यरूपायै नमः । ८०। श्रीजयाङ्गायै नमः । श्रीजपध्यानसन्तुष्टसंज्ञायै नमः । श्रीजयप्राणरूपायै नमः । श्रीजयस्वर्णदेहायै नमः । श्रीजयज्वालिन्यै नमः । श्रीयामिन्यै नमः । श्रीयाम्यरूपायै नमः । श्रीजगन्मातृरूपायै नमः । श्रीजगद्रक्षणायै नमः । श्रीस्वधावौषडन्तायै नमः ।९०। श्रीविलम्बाविलम्बायै नमः । श्रीषडङ्गायै नमः । श्रीमहालम्बरूपाऽसिहस्ताऽऽप्दाहारिण्यै नमः । श्रीमहामङ्गलायै नमः । श्रीमङ्गलप्रेमकीर्त्यै नमः । श्रीनिशुम्भक्षिदायै नमः । श्रीशुम्भदर्पत्वहायै नमः । आनन्दबीजादिस्वरूपायै नमः । श्रीमुक्तिस्वरूपायै नमः । श्रीचण्डमुण्डापदायै नमः । १००। श्रीमुख्यचण्डायै नमः । श्रीप्रचण्डाऽप्रचण्डायै नमः । श्रीमहाचण्डवेगायै नमः । श्रीचलच्चामरायै नमः । श्रीचामराचन्द्रकीर्त्यै नमः । श्रीसुचामिकरायै नमः । श्रीचित्रभूषोज्ज्वलाङ्ग्यै नमः । श्रीसुसङ्गीतगीतायै नमः । १०८। देवी मातङ्गी के कुछ मन्त्र:- इनके मंत्र और यंत्र का उपयोग अधिकतर प्रवचनकर्ता ,धर्म गुरु ,तंत्र गुरु ,बौद्धिक लोग करते हैं जिन्हें समाज-भीड़-लोगों के समूह का नेतृत्व अथवा सामना करना होता है ,ज्ञान विज्ञानं की जानकारी चाहिए होती है। मातंगि शक्ति से इनमे सम्मोहन -वशीकरण की शक्ति होती है। (१) अष्टाक्षर मातंगी मंत्र- कामिनी रंजनी स्वाहा विनियोग— अस्य मंत्रस्य सम्मोहन ऋषि:, निवृत् छंद:, सर्व सम्मोहिनी देवता सम्मोहनार्थे जपे विनियोकग:। ध्यान-श्यामंगी वल्लकीं दौर्भ्यां वादयंतीं सुभूषणाम्। चंद्रावतंसां विविधैर्गायनैर्मोहतीं जगत्। फल व विधि- 20 हजार जप कर मधुयुक्त मधूक पूष्पों से हवन करने पर अभीष्ट की सिद्धि होती है। (२) दशाक्षर मंत्र- ॐ ह्री क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा। विनियोग— अस्य मंत्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषि:र्विराट् छंद:, मातंगी देवता, ह्रीं बीजं, हूं शक्ति:, क्लीं कीलकं, सर्वेष्टसिद्धये जपे विनियोग:। अंगन्यास— ह्रां, ह्रीं, ह्रूं, ह्रैं, ह्रौं, ह्र: से हृदयादि न्यास करें। फल व विधि- साधक छह हजार जप नित्य करते हुए 21 दिन प्रयोग करें। फिर दशांस हवन करें। चतुष्पद श्मसान या कलामध्य में मछली, मांस, खीर व गुगल का धूप दे तो कवित्व शक्ति की प्राप्ति होती है। इससे जल, अग्नि एवं वाणी का स्तंभन भी संभव है। इसकी साधना करने वाला वाद-विवाद में अजेय बन जाता है। उसके घर में स्वयं कुबेर आकर धन देते हैं। (३) लघुश्यामा मातंगी का विंशाक्षर मंत्र- ऐं नम: उच्छिष्ट चांडालि मातंगी सर्ववशंकरि स्वाहा। विधि- विनियोग व न्यास आदि के साथ देवी की पूजा कर 11, 21, 41 दिन या पूर्णिमा/आमावास्या से पूर्णिमा/आमावास्या तक एक लाख जप पूर्ण करें। मंत्र से ऐसा प्रतीत होता है कि इसका जप उच्छिष्ट मुंह किया जाना चाहिए। ऐसा किया भी जा सकता है लेकिन विभिन्न ग्रंथों में इसे पवित्र होकर करने का भी विधान है। अत: साधक गुरुआज्ञानुसार जप करें। जप पू्र्ण होने के बाद महुए के फूल व लकड़ी के दशांस होम कर तर्पन व मार्जन करें। फल- इसके प्रयोग से डाकिनी, शाकिनी एवं भूत-प्रेत बाधा नहीं पहुंचा सकते हैं। इसकी साधना से प्रसन्न होकर देवी साधक को देवतुल्य बना देती है। उसकी समस्त अभिलाषाएं पूरी होती हैं। चूंकि मातंगी वशीकरण विद्या की देवी हैं, इसलिए इसके साधक की वह शक्ति भी अद्भुत बढ़ती है। राजा-प्रजा सभी उसके वश में रहते हैं। (४) एकोन विंशाक्षर उच्छिष्ट मातंगी तथा द्वात्रिंशदक्षरों मातंगी मंत्र मंत्र (एक)— नम: उच्छिष्ट चांडालि मातंगी सर्ववशंकरि स्वाहा। मंत्र (दो)—- ऊं ह्रीं ऐं श्रीं नमो भगवति उच्छिष्टचांडालि श्रीमातंगेश्वरि सर्वजन वशंकरि स्वाहा। विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे। फल- मधुयुक्त महुए के फूल व लकड़ी से हवन करने पर वशीकरण का प्रयोग सिद्ध होता है। मल्लिका फूल के होम से योग सिद्धि, बेल फूल के हवन से राज्य प्राप्ति, पलास के पत्ते व फूल के हवन में जन वशीकरण, गिलोय के हवन से रोगनाश, थोड़े से नीम के टुकड़ों व चावल के हवन से धन प्राप्ति, नीम के तेल से भीगे नमक से होम करने पर शत्रुनाश, केले के फल के हवन से समस्त कामनाओं की सिद्धि होती है। खैर की लकड़ी से हवन कर मधु से भीगे नमक के पुतले के दाहिने पैर की ओर हवन की अग्नि में तपाने से शत्रु वश में होता है। (५) सुमुखी मातंगी प्रयोग इसमें दो मंत्र हैं जिसमें सिर्फ ई की मात्रा का अंतर है पर ऋषि दोनों के अलग-अलग हैं। इसमें फल समान है। मंत्र(१) उच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठ: ठ: ठ:। इसके ऋषि अज, छंद गायत्री और देवता सुमुखी मातंगी हैं। विधि- देवी के विधिपूर्वक पूजन के बाद जूठे मुंह आठ हजार जप करने से ही इसका पुरश्चरण होता है। साधक को धन की प्राप्ति होती है और उसका आभामंडल बढ़ता है। हवन की विधि नीचे है। मंत्र(२) उच्छिष्ट चांडालिनि सुमुखि देवि महापिशाचिनि ह्रीं ठ: ठ: ठ:। इसके ऋषि भैरव, छंद गायत्री और देवता सुमुखी मातंगी हैं। विधि- इसकी कई विधियां हैं। एक में एक लाख मंत्र जप का भी विधान वर्णित है। जानकरों के अनुसार देवी के विधिपूर्वक पूजन के बाद जूठे मुंह दस हजार जप करने से ही इसका पुरश्चरण होता है और साधक को धन की प्राप्ति होती है तथा उसका आभामंडल बढ़ता है। हवन विधि- दही मिश्रित पीली सरसो व चावल से हवन करने पर राजा-मंत्री सभी वश में हो जाते हैं। बिल्ली के मांस से हवन करने पर शस्त्र का वसीकरण होता है। बकरे के मांस के हवन से धन-समृद्धि मिलती है। खीर के हवन से विद्या प्राप्ति तथा मधु व घी युक्त पान के पत्तों के हवन से महासमृद्धि की प्राप्ति होती है। कौवे व उल्लू के पंख के हवन से शत्रुओं का विद्वेषण होता है। (६) कर्ण मातंगी साधना मंत् ऐं नमः श्री मातंगि अमोघे सत्यवादिनि ममकर्णे अवतर अवतर सत्यं कथय एह्येहि श्री मातंग्यै नमः। ऐं बीज से षडंगन्यास करें। पुरश्चरण के लिए आठ हजार की संख्या में जप करें। कई बार प्रतिकूल ग्रह स्थिति रहने पर जप संख्या थोड़ी बढ़ानी भी पड़ती है। 41 दिन मे साधना पूर्ण होती है । दोनों मे से किसी एक मंत्र का जाप कर सकते है । लाल चन्दन की या मूँगे या रुद्राक्ष की माला मंत्र जाप के लिए श्रेष्ठ है । इसमें हवन भी आवश्यक नहीं है। खीर को प्रसाद रूप में माता को चढ़ा कर उससे हवन करना अतिरिक्त ताकत देता है। इसके साधक को माता कर्ण मातंगी भविष्य में घटने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं की जानकारी स्वप्न में देती हैं। इच्छुक साधक को माता से प्रश्न का जवाब भी मिल जाता है। भक्ति-पूर्वक एवं निष्काम साधना करने पर माता साधक का पथ-प्रदर्शन करती हैं। (७) मातङ्गी गायत्री:- ॐ शुकप्रियाये विद्महे श्रीकामेश्वर्ये धीमहि तन्न: श्यामा प्रचोदयात। (८) मातंगी शाबर मन्त्र ॐ शून्य शून्य महाशून्य, महाशून्य में ॐ-कार, ॐ-कार में शक्ति, शक्ति अपन्ते उहज आपो आपना, सुभय में धाम कमल में विश्राम, आसन बैठी, सिंहासन बैठी पूजा पूजो मातंगी बाला, शीश पर अस्वारी उग्र उन्मत्त मुद्राधारी, उद गुग्गल पाण सुपारी, खीरे खाण्डे मद्य-मांसे घृत-कुण्डे सर्वांगधारी । बुन्द मात्रेन कडवा प्याला, मातंगी माता तृप्यन्ते ।
ॐ मातंगी-सुन्दरी, रुपवन्ती, कामदेवी, धनवन्ती, धनदाती, अन्नपूर्णी अन्नदाती, मातंगी जाप मन्त्र जपे काल का तुम काल को खाये । तिसकी रक्षा शम्भुजती गुरु गोरखनाथजी करे ।
(९) मातङ्गी यन्त्र:- जिनके घर में सदा क्लेश हो, पति पत्नी में मतभेद बढ़ गए हों, एक दूसरे की तरफ प्रेम न हो, तरक्की न होती हो या संतान गलत दिशा में भटक गयी हो अथवा रोज कोई न कोई अपशकुन होता हो उन्हें किसी सिध्द मातङ्गी साधक से मातङ्गी यन्त्र विधि पूर्वक प्रतिष्ठित करवा कर अपने घर मे स्थापित करना चाहिए व् इसका नित्य पूजन करना चाहिए। नोट= मातंगी महाविद्या का मंत्र , मातंगी साधक ही प्रदान कर सकता है ,अन्य किसी महाविद्या का साधक इनके मंत्र को प्रदान करने का अधिकारी नहीं है । स्वयं मंत्र लेकर जपने से महाविद्याओं के मंत्र सिद्ध नहीं होते ,अतः जब भी मंत्र लिया जाए मातंगी साधक से ही लिया जाए , यद्यापि मातंगी साधक खोजे नहीं मिलते जबकि अन्य महाविद्या के साधक मिल जाते हैं । अतः किसी भी मन्त्र प्रयोग से पूर्व किसी सिद्ध मातङ्गी साधक से दीक्षा अवश्य लें। देवी मातंगी जयंती के उपलक्ष पर माता की पूजा अर्चना की जाती है. इस पावन अवसर पर जो भी कोई माता की पूजा करता है वह सर्व-सिद्धियों का लाभ प्राप्त करता है. मातंगी की पूजा व्यक्ति को सुखी जीवन का आशीर्वाद प्रदान करती है. इस वर्ष श्री मातंगी जयंती 03 मई 2022, को मनाई जाएगी. देवी मातंगी दसमहाविद्या में नवीं महाविद्या हैं. यह वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी कही जाती हैं. यह स्तम्भन की देवी हैं तथा इनमें संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं. देवी मातंगी दांपत्य जीवन को सुखी एवं समृद्ध बनाने वाली होती हैं इनका पूजन करने से गृहस्थ के सभी सुख प्राप्त होते हैं. माँ मातंगी पुरुषार्थ चतुष्ट्य की प्रदात्री हैं. भगवती मातंगी अपने भक्तों को अभय का फल प्रदान करती हैं. यह अभीष्ट सिद्धि प्रदान करती हैं. माँ मातंगी कथा महादेवी माँ मातंगी स्वरुप हैं. इनकी साधना साधक को सभी कष्टों से मुक्त कर देती है. इनका महा मंत्र ‘क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है. जीवन में माता के प्रेम की कमी अथवा माता को कोई कष्ट हो आकाल या बाढ़ से पीड़ित हों तो देवी मातंगी का जाप करना चाहिए. नौवे दिन की महा देवी माँ मातंगी स्वरुप हैं. मतंग भगवान शिव का एक नाम है इनकी आदिशक्ति देवी मातंगी हैं. यह श्याम वर्ण और चन्द्रमा को मस्तक पर धारण किए हुए हैं. यह वाग्देवी हैं इनकी भुजाएं चार वेद हैं. मां मातंगी वैदिकों की सरस्वती है. पलास और मल्लिका पुष्पों से युक्त बेलपत्रों की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर आकर्षण और स्तम्भन शक्ति का विकास होता है. देवी मातंगी को उच्छिष्टचांडालिनी या महापिशाचिनी भी कहा जाता है. मातंगी के विभिन्न प्रकार के भेद हैं उच्छिष्टमातंगी, राजमांतगी, सुमुखी, वैश्यमातंगी, कर्णमातंगी, आदि यह देवी दक्षिण तथा पश्चिम की देवता हैं . ब्रह्मयामल के अनुसार मातंग मुनि ने दीर्घकालीन तपस्या द्वारा देवी को कन्यारूप में प्राप्त किया था. यह भी प्रसिद्धि है कि वन में मातंग ऋषि तपस्या करते थे. क्रूर विनाशकारी शक्तियों के दमन के लिये उस स्थान में त्रिपुरसुंदरी के चक्षु से एक तेज निकल पड़ा तब देवी काली उसी तेज के द्वारा श्यामल रूप धारण करके राजमातंगी रूप में प्रकट हुईं. माँ मातंगी स्वरूप राक्षसों का नाश व उनका वध करने हेतु माता मातंगी ने विशिष्ट तेजस्वी स्वरुप धारण किया देवी माता का यही रूप मातंगी रूप में अवतरित हुआ, मातंगी लाल रंग के वस्त्र धारण करती हैं , सिंह की सवारी करती है लाल होठ वाली व अत्यंत ओजपूर्ण हैं. मातंगी लाल पादुका, लाल माला, धारण करती है. हाथो में धनुषबाण , शंख , पाश, कतार, छत्र , त्रिशूल , अक्षमाला, शक्ति आदि अपने हाथो में धारण करती हैं। मातंगी देवी यन्त्र माला दीक्षा हवन Contact करें।
🌺🔱 स्वप्न मातंगी मंत्र साधना विधान 🔱🌺(गोपनीय साधना • स्वप्न-सिद्धि • आकर्षण • वाणी-प्रभाव • अंतःदृष्टि जागरण) ✨ स्वप्न मातंगी देवी – एक दिव्य परिचय ✨ स्वप्न मातंगी महाविद्या मातंगी का एक अत्यंत रहस्यमय और शक्तिशाली स्वरूप हैं। ये … Continue reading स्वप्न मातंगी मंत्र साधना→
माँ मातंगी: मौन से वाणी के सिंहासन तक तांत्रिक ज्ञान आगम और शास्त्र एक गहन सत्य प्रकट करते हैं: वाणी मात्र ध्वनि नहीं, बल्कि चेतना का कंपन है। यह अव्यक्त और प्रकट, मौन परम सत्ता और जीवंत जगत के … Continue reading मातंगी मंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना :- 1-महाविद्या मातंगी, महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। देवी निम्न वर्ग एवं जनजातिओ से सम्बंधित हैं। देवी का एक अन्य नाम उच्छिष्ट चांडालिनी भी हैं। देवी तंत्र क्रियाओं की अधिष्ठात्री हैं। इंद्रजाल या जादुई … Continue reading मातंगी सम्मोहन मंत्र साधना→
महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच सभी के लिए उपयोगी होता है। मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या। वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं। यह सरस्वती का ही प्रखर रूप … Continue reading मातंगी देवी यन्त्र -ताबीज -कवच→
मातंगी Matangi Devi Mantra Sadhana साधना विधि यह साधना मातंगी जयन्ती, मातंगी सिद्धि दिवस अथवा किसी भी सोमवार के दिन से शुरू की जा सकती है। यह साधना रात्रिकालीन है और इसे रात्रि में ९ बजे के बाद शुरु … Continue reading मातंगी तंत्र मंत्र यंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना वर्तमान युग में, मानव जीवन के प्रारंभिक पड़ाव से अंतिम पड़ाव तक भौतिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है । व्यक्ति जब तक भौतिक जीवन का पूर्णता से निर्वाह नहीं कर लेता है, तब … Continue reading मातंगी साधना Matangi Mantra→
तेल मातंगी प्रयोग (भूत-भविष्य दर्शन साधना) मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर चंद्र इनके तीन नेत्र हैं और यह रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान … Continue reading तेल मांतगी भूत भविष्य दर्शन मंत्र→
Matangi Devi Haven yagha 🔥 विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे। फल- मधुयुक्त महुए के … Continue reading मातंगी हवन 🔥 yagha→
मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। मनुष्यों को सर्व-सिद्धि-प्रददिव्य मातंगी-कवच अति उत्तम है, उस कवच को मुझसे कहिए। श्री ईश्वर उवाच श्रृणु देवि। प्रवक्ष्यामि, मातंगी-कवचं … Continue reading मातंगी कवच→
मातंगी देवी तंत्र मंत्र साधना हवन Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग भैरवी मंत्र साधना छिन्नमस्ता … Continue reading मातंगी Matangi Devi video→
1-महाविद्या मातंगी, महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। देवी निम्न वर्ग एवं जनजातिओ से सम्बंधित हैं। देवी का एक अन्य नाम उच्छिष्ट चांडालिनी भी हैं। देवी तंत्र क्रियाओं की अधिष्ठात्री हैं। इंद्रजाल या जादुई शक्ति से देवी परिपूर्ण हैं। वाक् सिद्धि, संगीत और अन्य ललित कलाओं में निपुण, सिद्ध विद्या हैं। महाविद्या मातंगी, केवल मात्र वचन द्वारा त्रि-भुवन में समस्त प्राणिओं तथा अपने घनघोर शत्रु को भी वश करने में समर्थ हैं, जिसे सम्मोहन क्रिया या वशीकरण कहा जाता हैं; देवी सम्मोहन विद्या की स्वामिनी हैं। इनका सम्बन्ध प्रकृति, पशु, पक्षी, जंगल, वन, शिकार इत्यादि से भी है। जंगल में वास करने वाले आदिवासिओ, जनजातिओ द्वारा देवी पूजिता हैं। ऐसा माना जाता हैं कि! देवी की ही कृपा से वैवाहिक जीवन सुखमय होता हैं।देवी गृहस्थ के समस्त कष्टों का निवारण करती हैं। महाविद्या मातंगी, मतंग मुनि की पुत्री रूप से भी जानी जाती हैं। देवी का घनिष्ठ सम्बन्ध उच्छिष्ट भोजन पदार्थों से हैं। देवी तभी उच्छिष्ट चांडालिनी नाम से विख्यात हैं, देवी की आराधना हेतु उपवास की भी आवश्यकता नहीं होती।
देवी की आराधना हेतु उच्छिष्ट सामाग्रीओं की आवश्यकता होती हैं क्योकि देवी की उत्पत्ति शिव तथा पार्वती के उच्छिष्ट भोजन से हुई थी। देवी की आराधना सर्वप्रथम विष्णुजी द्वारा की गई, माना जाता हैं! तभी से विष्णुजी सुखी, सम्पन्न, श्रीयुक्त तथा उच्च पद पर विराजित हैं। देवी की आराधना बौद्ध धर्म में भी की जाती हैं। देवी बौद्ध धर्मं में “मातागिरी” नाम से विख्यात हैं। 2-महाविद्या मातंगी श्याम वर्णा या नील कमल के समान कांति युक्त हैं। तीन नेत्र तथा अर्ध चन्द्र को अपने मस्तक पर धारण करती हैं। देवी चार भुजाओं से युक्त हैं। अपने दाहिने भुजा में वीणा तथा मानव खोपड़ी धारण कर रखी हैं और बायें भुजाओं में खड़ग एवं अभय मुद्रा। देवी, लाल रंग की रेशमी साड़ी तथा अमूल्य रत्नों से युक्त नाना अलंकार धारण करती हैं।
देवी के संग सर्वदा तोता पक्षी रहता हैं तथा ‘ह्रीं ‘बीजाक्षर का जप करता रहता हैं।देवी मातंगी के चंडालनी रूप का सम्बन्ध मृत शरीर-शव तथा श्मशान भूमि से हैं। देवी अपने दाहिने हाथ पर महा-शंख (मनुष्य खोपड़ी) या खोपड़ी से निर्मित खप्पर, धारण करती हैं। पारलौकिक या इंद्रजाल, मायाजाल से सम्बंधित रखने वाले सभी देवी-देवता श्मशान, शव, चिता, चिता-भस्म, हड्डी इत्यादि से सम्बंधित रहते हैं। इन पारलौकिक शक्तियों का वास मुख्यतः इन्हीं स्थानों पर होता हैं। तंत्र विद्या के अनुसार देवी तांत्रिक सरस्वती नाम से जानी जाती हैं एवं श्रीविद्या महा त्रिपुरसुंदरी के रथ की सारथी तथा मुख्य सलाहकार हैं। प्रादुर्भाव ;-
1-शक्ति-संगम तंत्र के अनुसार, एक बार विष्णुजी और लक्ष्मीजी सहित शिव- पार्वती से मिलने हेतु कैलाश शिखर पर गये। विष्णुजी अपने साथ कुछ खाने की सामग्री ले गए थे। उन्होंने वह खाद्य पदार्थ शिवजी को भेट किया।
भगवान शिव और पार्वती ने, प्राप्त वस्तुओं को खाया। भोजन करते हुए खाने का कुछ अंश धरती पर गिर गया। उस गिरे हुए भोजन से एक श्याम वर्ण वाली दासी ने जन्म लिया, जो मातंगी नाम से विख्यात हुई।
देवी का प्रादुर्भाव उच्छिष्ट भोजन से हुआ, परिणामस्वरूप देवी का सम्बन्ध उच्छिष्ट भोजन सामग्रियों से हैं तथा उच्छिष्ट वस्तुओं से देवी की आराधना होती हैं। देवी उच्छिष्ट मातंगी नाम से इसीलिए जानी भी जाती हैं।प्राणतोषिनी तंत्र के अनुसार, एक बार पार्वती देवी ने, शिव से अपने पिता हिमालय राज के यहाँ जाने की अनुमति मांगी। भगवान शिव नहीं चाहते थे कि वे अकेले रहें। भगवान शिव से बार-बार प्रार्थना करने पर, उन्होंने पार्वती को पिता हिमालय राज के यहाँ जाने की अनुमति दे दी। साथ ही उन्होंने एक शर्त भी रखी कि वे शीघ्र ही माता-पिता से मिलकर वापस आ जाएगी। अपनी पुत्री पार्वती को कैलाश से लेने हेतु, उनकी माता ने एक बगुला वाहन स्वरूप भेजा था।
2-पार्वती की शीघ्र वापसी न होने पर एक दिन शिवजी ने अपना भेष एक आभूषण के व्यापारी के रूप में बदला तथा हिमालय राज के घर पहुच गए। इस भेष में देवी पार्वती की भी परीक्षा लेना चाहते थे।
वे पार्वती के सनमुख गए और अपनी इच्छा अनुसार आभूषणों का चुनाव करने के लिया कहा। पार्वती ने जब कुछ आभूषणों का चुनाव कर लिया और उनसे मूल्य जानना चाहा, तब व्यापारी रूपी भगवान शिव ने देवी से आभूषणों के मूल्य के बदले, उनसे प्रेम की इच्छा प्रकट की। देवी पार्वती अत्यंत क्रोधित हुई किन्तु तत्क्षण ही अपनी अलौकिक शक्तिओं से उन्होंने पहचान भी लिया।व्यापारी रूपी शिवजी कुछ दिनों पश्चात कैलाश लौट आये।कुछ अंतराल में देवी पार्वती भी भेष बदल कर कैलाश पर्वत पर आई। भगवान शिव अपने नित्य संध्योपासना की तैयारी कर रहे थे। देवी पार्वती लाल वस्त्र धारण किये हुए, बड़ी-बड़ी आँखें, श्याम वर्ण तथा दुबले शरीर से युक्त अपने पति के सन्मुख प्रकट हुई। भगवान शिव ने देवी से उनका परिचय पूछा, देवी ने उत्तर दिया कि वह एक चांडाल की कन्या हैं तथा तपस्या करने आई हैं। भगवान शिव ने देवी को पहचान लिया तथा कहाँ “वे तपस्वी को तपस्या का फल प्रदान करने वाले हैं।“ यह कहते हुए उन्होंने देवी का हाथ पकड़ लिया। देवी ने भगवान शिव से वर देने का निवेदन किया।
भगवान शिव ने उनके इसी रूप को चांडालिनी वर्ण से अवस्थित होने का वरदान दिया साथ ही कई अलौकिक शक्तियां प्रदान की। संक्षेप में देवी मातंगी से सम्बंधित मुख्य तथ्य ; मुख्य नाम : मातंगी। अन्य नाम : सुमुखी, लघुश्यामा या श्यामला, उच्छिष्ट-चांडालिनी, उच्छिष्ट-मातंगी, राज-मातंगी, कर्ण-मातंगी, चंड-मातंगी, वश्य-मातंगी, मातंगेश्वरी, ज्येष्ठ-मातंगी, सारिकांबा, रत्नांबा मातंगी, वर्ताली मातंगी। भैरव : मतंग। भगवान के 24 अवतारों से सम्बद्ध : बुद्ध अवतार। तिथि : वैशाख शुक्ल तृतीया। कुल : श्रीकुल। दिशा : पूर्व । स्वभाव : सौम्य स्वभाव। कार्य : सम्मोहन एवं वशीकरण, तंत्र विद्या पारंगत, संगीत तथा ललित कला निपुण। शारीरिक वर्ण : काला या गहरा नीला।
साधना:- मंत्र सिद्ध यंत्र व माला लेकर साधना करनी चाहिए|
1-यह देवी घर ग्रहस्थी मे आने वाले सभी विघ्नो को हरने वाली है, जिसकी शादी ना हो रही, संतान प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति के लिए या किसी भी प्रकार का ग्रहस्थ जीवन की समस्या के दुख हरने के लिए देवी मातंगी की साधना उत्तम है। इनकी कृपा से स्त्रियों का सहयोग सहज ही मिलने लगता है। चाहे वो स्त्री किसी भी वर्ग की स्त्री क्यो ना हो। इसके लिए आप स्फटिक की माला से मंत्र जप करें और और कम से कम बारह माला का जाप करना चाहिए.
मंत्र सिद्ध गुटका लेना चाहिए बताए जा रहे मंत्र का 108 बार जाप 11 दिन साध्य का ध्यान करते हुए गुटिका को अपनी मुट्ठी में दबा कर जाप करना होगा विधिवत अपने इष्ट देव का पूजन करके आपके इष्ट देव कोई भी हो इस सात्विक प्रयोग में उनकी ऊर्जा अवश्य ही लगेगी अपने इष्ट देव कुलदेव आदि की भी ऊर्जा इस प्रयोग में सम्मिलित की जा सकेगी मंत्र निम्न प्रकार से है ओम ह्रीं श्रीं क्लीं भगवती मातंगेश्वरी सर्व जन ह्रदयरंजिनी अमुकं मे वशम् कुरु कुरु स्वाहा ||
11 दिन 1100 मंत्रों से गुटिका सिद्ध करके पुनः गुटिका का कुंकुम् युक्त शहद का तिलक उक्त मंत्र से मंत्रित का मस्तक पर लगाकर व्यक्ति के संमुख जाने से प्रबल आकर्षण होता है या किसी मिठाई आदि मे खिला देने से और भी प्रबलता से कार्य होता है ।
🌺🔱 स्वप्न मातंगी मंत्र साधना विधान 🔱🌺(गोपनीय साधना • स्वप्न-सिद्धि • आकर्षण • वाणी-प्रभाव • अंतःदृष्टि जागरण) ✨ स्वप्न मातंगी देवी – एक दिव्य परिचय ✨ स्वप्न मातंगी महाविद्या मातंगी का एक अत्यंत रहस्यमय और शक्तिशाली स्वरूप हैं। ये … Continue reading स्वप्न मातंगी मंत्र साधना→
माँ मातंगी: मौन से वाणी के सिंहासन तक तांत्रिक ज्ञान आगम और शास्त्र एक गहन सत्य प्रकट करते हैं: वाणी मात्र ध्वनि नहीं, बल्कि चेतना का कंपन है। यह अव्यक्त और प्रकट, मौन परम सत्ता और जीवंत जगत के … Continue reading मातंगी मंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना :- 1-महाविद्या मातंगी, महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। देवी निम्न वर्ग एवं जनजातिओ से सम्बंधित हैं। देवी का एक अन्य नाम उच्छिष्ट चांडालिनी भी हैं। देवी तंत्र क्रियाओं की अधिष्ठात्री हैं। इंद्रजाल या जादुई … Continue reading मातंगी सम्मोहन मंत्र साधना→
महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच सभी के लिए उपयोगी होता है। मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या। वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं। यह सरस्वती का ही प्रखर रूप … Continue reading मातंगी देवी यन्त्र -ताबीज -कवच→
मातंगी Matangi Devi Mantra Sadhana साधना विधि यह साधना मातंगी जयन्ती, मातंगी सिद्धि दिवस अथवा किसी भी सोमवार के दिन से शुरू की जा सकती है। यह साधना रात्रिकालीन है और इसे रात्रि में ९ बजे के बाद शुरु … Continue reading मातंगी तंत्र मंत्र यंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना वर्तमान युग में, मानव जीवन के प्रारंभिक पड़ाव से अंतिम पड़ाव तक भौतिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है । व्यक्ति जब तक भौतिक जीवन का पूर्णता से निर्वाह नहीं कर लेता है, तब … Continue reading मातंगी साधना Matangi Mantra→
तेल मातंगी प्रयोग (भूत-भविष्य दर्शन साधना) मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर चंद्र इनके तीन नेत्र हैं और यह रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान … Continue reading तेल मांतगी भूत भविष्य दर्शन मंत्र→
Matangi Devi Haven yagha 🔥 विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे। फल- मधुयुक्त महुए के … Continue reading मातंगी हवन 🔥 yagha→
मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। मनुष्यों को सर्व-सिद्धि-प्रददिव्य मातंगी-कवच अति उत्तम है, उस कवच को मुझसे कहिए। श्री ईश्वर उवाच श्रृणु देवि। प्रवक्ष्यामि, मातंगी-कवचं … Continue reading मातंगी कवच→
मातंगी देवी तंत्र मंत्र साधना हवन Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग भैरवी मंत्र साधना छिन्नमस्ता … Continue reading मातंगी Matangi Devi video→
यह साधना मातंगी जयन्ती, मातंगी सिद्धि दिवस अथवा किसी भी सोमवार के दिन से शुरू की जा सकती है। यह साधना रात्रिकालीन है और इसे रात्रि में ९ बजे के बाद शुरु करना चाहिए।
सर्वप्रथम साधक स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल वस्त्र पहिनकर पश्चिम दिशा की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठ जाए। अपने सामने लाल वस्त्र बिछा ले। इस साधना में माँ मातंगी का यंत्र व माला लेकर साधना शुरू करें ।
सबसे पहले साधक शुद्ध घी का दीपक प्रज्ज्वलित कर धूप-अगरबत्ती भी लगा दे। फिर सामान्य गुरुपूजन सम्पन्न करे और गुरुमन्त्र का चार माला जाप कर ले। फिर सद्गुरुदेवजी से साधना की निर्बाध पूर्णता और सफलता के लिए प्रार्थना करे।
इसके बाद साधक संक्षिप्त गणेशपूजन सम्पन्न करे और
“ॐ वक्रतुण्डाय हूं”
मन्त्र की एक माला जाप करे। फिर भगवान गणपतिजी से साधना की निर्विघ्न पूर्णता और सफलता के लिए प्रार्थना करे।
देवी की 8 शक्तियां
1- रति,
2- प्रीति,
3- मनोभाव,
4- क्रिया,
5- शुधा,
6- अनंग कुसुम,
7- अनंग मदन तथा
8- मदन लसा,
देवी मातंगी की आठ शक्तियों का आवाहन पूजा करैं।
फिर साधक संक्षिप्त
भैरवपूजन सम्पन्न करे और
“ॐ हूं भ्रं हूं मतंग भैरवाय नमः”
मन्त्र की एक माला जाप करे। फिर भगवान मतंग भैरवजी से साधना की निर्बाध पूर्णता और सफलता के लिए प्रार्थना करे।इसके बाद साधक को साधना के पहिले दिन संकल्प अवश्य लेना चाहिए। साधक दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प लें कि, “मैं अमुक नाम का साधक गोत्र अमुक आज से श्री मातंगी साधना का अनुष्ठान आरम्भ कर रहा हूँ। मैं नित्य २१ दिनों तक ५१ माला मन्त्र जाप करूँगा। माँ ! मेरी साधना को स्वीकार कर मुझे मन्त्र की सिद्धि प्रदान करे तथा इसकी ऊर्जा को मेरे भीतर स्थापित कर दे।”
इसके बाद साधक भगवती मातंगी का सामान्य पूजन करे। कुमकुम, अक्षत, पुष्प आदि से पूजा करके कोई भी मिष्ठान्न भोग में अर्पित करे।
फिर साधक निम्न विनियोग का उच्चारण कर एक आचमनी जल भूमि पर छोड़ दे.
ॐ दक्षिणामूर्ति ऋषये नमः शिरसि। (सिर को स्पर्श करें) विराट् छन्दसे नमः मुखे। (मुख को स्पर्श करें) मातंगी देवतायै नमः हृदि। (हृदय को स्पर्श करें) ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये। (गुह्य स्थान को स्पर्श करें) हूं शक्तये नमः पादयोः। (पैरों को स्पर्श करें) क्लीं कीलकाय नमः नाभौ। (नाभि को स्पर्श करें) विनियोगाय नमः सर्वांगे। (सभी अंगों को स्पर्श करें)करन्यास
ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः। (दोनों तर्जनी उंगलियों से दोनों अँगूठे को स्पर्श करें) ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः। (दोनों अँगूठों से दोनों तर्जनी उंगलियों को स्पर्श करें) ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः। (दोनों अँगूठों से दोनों मध्यमा उंगलियों को स्पर्श करें) ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः। (दोनों अँगूठों से दोनों अनामिका उंगलियों को स्पर्श करें) ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः। (दोनों अँगूठों से दोनों कनिष्ठिका उंगलियों को स्पर्श करें) ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः। (परस्पर दोनों हाथों को स्पर्श करें)
हृदयादिन्यास
ॐ ह्रां हृदयाय नमः। (हृदय को स्पर्श करें) ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा। (सिर को स्पर्श करें) ॐ ह्रूं शिखायै वषट्। (शिखा को स्पर्श करें) ॐ ह्रैं कवचाय हूं। (भुजाओं को स्पर्श करें) ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट्। (नेत्रों को स्पर्श करें) ॐ ह्रः अस्त्राय फट्। (सिर से घूमाकर तीन बार ताली बजाएं)
इस प्रकार ध्यान करने के बाद साधक निम्न मन्त्र का ५१ माला जाप करे.
मातंगी देवी मन्त्र
ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
ohm Hreem kleem hum maatangayei phat swahaa
यह साधना दिखने में ही साधारण हो सकती है, परन्तु यह मन्त्र साधना अत्यन्त तीव्र है। मातंगी महाविद्या साधना विश्व की सर्वश्रेष्ठ साधना है, जो साधक के दुर्भाग्य को भी बदलकर उसे भाग्यवान बना देती है। आज तक इस साधना में किसी को असफलता नहीं मिली है। मन्त्र जाप के पश्चात मातंगी कवच का एक पाठ अवश्य ही करे।
मुख्य नाम : मातंगी।
अन्य नाम : सुमुखी, लघुश्यामा या श्यामला, उच्छिष्ट-चांडालिनी, उच्छिष्ट-मातंगी, राज-मातंगी, कर्ण-मातंगी, चंड-मातंगी, वश्य-मातंगी, मातंगेश्वरी, ज्येष्ठ-मातंगी, सारिकांबा, रत्नांबा मातंगी, वर्ताली मातंगी।
भैरव : मतंग।
सम्बन्ध -विष्णु जी तिथि : वैशाख शुक्ल तृतीया।
कुल : श्री कुल।
दिशा : वायव्य कोण।
स्वभाव : सौम्य स्वभाव।
कार्य : सम्मोहन एवं वशीकरण, तंत्र विद्या पारंगत, संगीत तथा ललित कला निपुण।
संतान प्राप्ति,पुत्र प्राप्ति, आकृषण प्राप्ति, ज्ञान प्राप्ति, आदि के लिए मातंगी देवी की साधना करें ।। मातंगी महाविद्या साधना से साधक को पूर्ण गृहस्थ सुख, शत्रुओ का नाश, भोग विलास, आपार सम्पदा, वाक सिद्धि, कुंडली जागरण, आपार सिद्धियां, काल ज्ञान, इष्ट दर्शन आदि प्राप्त होते ही है ।।
लघुश्यामा मातंगी का विंशाक्षर मंत्र-
ऐं नम: उच्छिष्ट चांडालि मातंगी सर्ववशंकरि स्वाहा।
विधि- विनियोग व न्यास आदि के साथ देवी की पूजा कर 11, 21, 41 दिन या पूर्णिमा/आमावास्या से पूर्णिमा/आमावास्या तक एक लाख जप पूर्ण करें। मंत्र से ऐसा प्रतीत होता है कि इसका जप उच्छिष्ट मुंह किया जाना चाहिए। ऐसा किया भी जा सकता है लेकिन विभिन्न ग्रंथों में इसे पवित्र होकर करने का भी विधान है। अत: साधक गुरुआज्ञानुसार जप करें। जप पू्र्ण होने के बाद महुए के फूल व लकड़ी के दशांस होम कर तर्पन व मार्जन करें।
फल- इसके प्रयोग से डाकिनी, शाकिनी एवं भूत-प्रेत बाधा नहीं पहुंचा सकते हैं। इसकी साधना से प्रसन्न होकर देवी साधक को देवतुल्य बना देती है। उसकी समस्त अभिलाषाएं पूरी होती हैं। चूंकि मातंगी वशीकरण विद्या की देवी हैं, इसलिए इसके साधक की वह शक्ति भी अद्भुत बढ़ती है। राजा-प्रजा सभी उसके वश में रहते हैं।
(४) एकोन विंशाक्षर उच्छिष्ट मातंगी तथा द्वात्रिंशदक्षरों मातंगी मंत्र
मंत्र (एक)— नम: उच्छिष्ट चांडालि मातंगी सर्ववशंकरि स्वाहा।
विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे।सुमुखी मातंगी प्रयोग
इसमें दो मंत्र हैं जिसमें सिर्फ ई की मात्रा का अंतर है पर ऋषि दोनों के अलग-अलग हैं। इसमें फल समान है।
मंत्र(१) उच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठ: ठ: ठ:।
इसके ऋषि अज, छंद गायत्री और देवता सुमुखी मातंगी हैं।
विधि- देवी के विधिपूर्वक पूजन के बाद जूठे मुंह आठ हजार जप करने से ही इसका पुरश्चरण होता है। साधक को धन की प्राप्ति होती है और उसका आभामंडल बढ़ता है। हवन की विधि नीचे है।
इसके ऋषि भैरव, छंद गायत्री और देवता सुमुखी मातंगी हैं।
विधि- इसकी कई विधियां हैं। एक में एक लाख मंत्र जप का भी विधान वर्णित है। जानकरों के अनुसार देवी के विधिपूर्वक पूजन के बाद जूठे मुंह दस हजार जप करने से ही इसका पुरश्चरण होता है और साधक को धन की प्राप्ति होती है तथा उसका आभामंडल बढ़ता है।
हवन विधि- दही मिश्रित पीली सरसो व चावल से हवन करने पर राजा-मंत्री सभी वश में हो जाते हैं। हवन से धन-समृद्धि मिलती है। खीर के हवन से विद्या प्राप्ति तथा मधु व घी युक्त पान के पत्तों के हवन से महासमृद्धि की प्राप्ति होती है।
कर्ण मातंगी साधना मंत्र
ऐं नमः श्री मातंगि अमोघे सत्यवादिनि ममकर्णे अवतर अवतर सत्यं कथय एह्येहि श्री मातंग्यै नमः।
ऐं बीज से षडंगन्यास करें। पुरश्चरण के लिए आठ हजार की संख्या में जप करें। कई बार प्रतिकूल ग्रह स्थिति रहने पर जप संख्या थोड़ी बढ़ानी भी पड़ती है।
41 दिन मे साधना पूर्ण होती है । दोनों मे से किसी एक मंत्र का जाप कर सकते है । लाल चन्दन की या मूँगे या रुद्राक्ष की माला मंत्र जाप के लिए श्रेष्ठ है । इसमें हवन भी आवश्यक नहीं है। खीर को प्रसाद रूप में माता को चढ़ा कर उससे हवन करना अतिरिक्त ताकत देता है। इसके साधक को माता कर्ण मातंगी भविष्य में घटने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं की जानकारी स्वप्न में देती हैं। इच्छुक साधक को माता से प्रश्न का जवाब भी मिल जाता है। भक्ति-पूर्वक एवं निष्काम साधना करने पर माता साधक का पथ-प्रदर्शन करती हैं।
मातङ्गी यन्त्र:-
जिनके घर में सदा क्लेश हो, पति पत्नी में मतभेद बढ़ गए हों, एक दूसरे की तरफ प्रेम न हो, तरक्की न होती हो या संतान गलत दिशा में भटक गयी हो अथवा रोज कोई न कोई अपशकुन होता हो उन्हें किसी सिध्द मातङ्गी साधक से मातङ्गी यन्त्र विधि पूर्वक प्रतिष्ठित करवा कर अपने घर मे स्थापित करना चाहिए व् इसका नित्य पूजन करना चाहिए।
मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। … Continue reading मातंगी कवच→
वर्तमान युग में, मानव जीवन के प्रारंभिक पड़ाव से अंतिम पड़ाव तक भौतिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है । व्यक्ति जब तक भौतिक जीवन का पूर्णता से निर्वाह नहीं कर लेता है, तब तक उसके मन में आसक्ति का भाव रहता ही है और जब इन इच्छाओ की पूर्ति होगी,तभी वह आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उन्नति कर सकता है । मातंगी महाविद्या साधना एक ऐसी साधना है जिससे आप भौतिक जीवन को भोगते हुए आध्यात्म की उँचाइयो को छु सकते है । मातंगी महाविद्या साधना से साधक को पूर्ण गृहस्थ सुख ,शत्रुओ का नाश, भोग विलास,आपार सम्पदा,वाक सिद्धि, कुंडली जागरण ,आपार सिद्धियां, काल ज्ञान ,इष्ट दर्शन आदि प्राप्त होते ही है इसीलिए ऋषियों ने कहा है —मातंगी मेवत्वं पूर्ण मातंगी पुर्णतः उच्यते; इससे यह स्पष्ट होता है की मातंगी साधना पूर्णता की साधना है । जिसने माँ मातंगी को सिद्ध कर लिया फिर उसके जीवन में कुछ अन्य सिद्ध करना शेष नहीं रह जाता । माँ मातंगी आदि सरस्वती है,जिसपे माँ मातंगी की कृपा होती है उसे स्वतः ही सम्पूर्ण वेदों, पुरानो, उपनिषदों आदि का ज्ञान हो जाता है ,उसकी वाणी में दिव्यता आ जाती है ,फिर साधक को मंत्र एवं साधना याद करने की जरुरत नहीं रहती ,उसके मुख से स्वतः ही धाराप्रवाह मंत्र उच्चारण होने लगता है । जब जब साधक बोलता है तो हजारो लाखो की भीड़ मंत्र मुग्ध सी उसके मुख से उच्चारित वाणी को सुनती रहती है । साधक की ख्याति संपूर्ण ब्रह्माण्ड में फैल जाती है ।कोई भी उससे शास्त्रार्थ में विजयी नहीं हो सकता,वह जहाँ भी जाता है विजय प्राप्त करता ही है । मातंगी साधना से वाक सिद्धि की प्राप्ति होते है, प्रकृति साधक से सामने हाँथ जोड़े खडी रहती है, साधक जो बोलता है वो सत्य होता ही है । माँ मातंगी साधक को वो विवेक प्रदान करती है की फिर साधक पर कुबुद्धि हावी नहीं होती,उसे दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है और ब्रह्माण्ड के समस्त रहस्य साधक के सामने प्रत्यक्ष होते ही है । भगवती मातंगी को उच्छिष्ट चाण्डालिनी भी कहते है,इस रूप में माँ साधक के समस्त शत्रुओ एवं विघ्नों का नाश करती है,फिर साधक के जीवन में ग्रह या अन्य बाधा का कोई असर नहीं होता । जिसे संसार में सब ठुकरा देते है,जिसे संसार में कही पर भी आसरा नहीं मिलता उसे माँ उच्छिष्ट चाण्डालिनी अपनाती है,और साधक को वो शक्ति प्रदान करती है जिससे ब्रह्माण्ड की समस्त सम्पदा साधक के सामने तुच्छ सी नजर आती है । महर्षि विश्वमित्र ने यहाँ तक कहा है की (मातंगी साधना में बाकि नव महाविद्याओ का समावेश स्वतः ही हो गया है )। अतः आप भी माँ मातंगी की साधना को करें जिससे आप जीवन में पूर्ण बन सके ।
साधना विधि
साधना सोमवार के दिन,पच्छिम दिशा मे मुख करके करना है।इस मे भगवती मातंगी मंत्र सिद्व माला और यंत्रमातंगी यंत्र माला लेकर ही साधना शुरु करें। वस्त्र आसन लाल रंग का हो,साधना रात्रि मे नौ बजे के बाद करे। नित्य २१ माला जाप ४१ दिनो तक करना चाहिए। देवि मातंगी वशीकरण की महाविद्या मानी जाती है,इसी मंत्र साधना से वशीकरण क्रिया भी सम्भव है। ४१ वे दिन कम से कम घी की १०८ आहूति हवन मे अर्पित करे। इस तरह से साधना पुर्ण होती है।४१ वे दिन भोजपत्र पर बनाये हुए यंत्र को चांदि के तावीज मे डालकर पहेन ले,यह एक दिव्य कवच माना जाता है।अक्षय तृतीया के दिन ”मातंगी जयंती” होती है और वैशाख पूर्णिमा ”मातंगी सिद्धि दिवस” होता है. ,इन बारहदिनों मे आप चाहे जितना मंत्र जाप कर सकते है ।
ये मंत्र साधना अत्यंत तीव्र मंत्र है । मातंगी महाविद्या साधना प्रयोग सर्वश्रेष्ठ साधना है जो साधक के जीवन को भाग्यवान बना देती है। मंत्र जाप के बाद अवश्य ही कवच का एक पाठ करे।
Matngi devi
🌺 माँ मातंगी देवी साधना 🌺
माँ मातंगी दशमहाविद्याओं में नवमी महाविद्या हैं। वे वाणी, संगीत, तंत्र, विद्या, वाक्-सिद्धि, सम्मोहन और अदृश्य प्रभाव की अधिष्ठात्री देवी हैं। माँ मातंगी की साधना विशेष रूप से उन साधकों के लिए फलदायी मानी जाती है जो बुद्धि, प्रभाव, वाणी की शक्ति, रचनात्मकता और गूढ़ ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। 🌿✨ 🔱 माँ मातंगी का स्वरूप माँ मातंगी का वर्ण श्याम-हरित (गहरा हरा) होता है। वे वीणा धारण करती हैं, जो संगीत और वाणी की सिद्धि का प्रतीक है। उनके चार भुजाएँ होती हैं—एक में वीणा, एक में खड्ग, एक में खप्पर और एक वरद मुद्रा में। वे श्मशान, उपेक्षित स्थानों और एकांत में विशेष रूप से शीघ्र प्रसन्न होती हैं। 🌑🎶 🕉️ साधना का श्रेष्ठ समय 🌙 अमावस्या, नवमी तिथि, या बुधवार 🌌 रात्रि 11:30 से 2:30 (निशा काल) 🪔 एकांत स्थान या साधना कक्ष 🪔 साधना की तैयारी स्नान कर हरे या नीले वस्त्र धारण करें 👘 हरे आसन (कुश या ऊनी) पर बैठें 🌿 सामने माँ मातंगी का चित्र या यंत्र स्थापित करें 🖼️ दीपक में तिल का तेल जलाएँ 🪔 नैवेद्य में उच्छिष्ट अन्न का प्रतीक (केला, गुड़, चावल) रखें 🍌🍚 ⚠️ माँ मातंगी उच्छिष्ट-प्रिय हैं, अतः यह साधना सामान्य पूजा से भिन्न होती है। 📿 माँ मातंगी साधना मंत्र (लेखक: रामकालिशास्त्री) 🌸 मूल मंत्र ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं मातंग्यै फट् स्वाहा॥ 🔮📿🔥 🌸 विशेष वाक्-सिद्धि मंत्र ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवति मातंग्यै सर्ववाक् सिद्धिं देहि देहि स्वाहा॥ 🗣️✨📜 🌸 तांत्रिक बीज मंत्र ॐ क्लीं ह्रीं मातंगे फट्॥ ⚡🕉️🖤 🔁 जप विधि 📿 माला: रुद्राक्ष या हरे हकीक 🔢 जप संख्या: 108 × 11 दिन या 21 माला प्रतिदिन 🧘♂️ ध्यान: माँ मातंगी को हरे प्रकाश में ध्यान करें 🫀 श्वास-प्रश्वास स्थिर रखें हर जप के साथ अनुभव होगा कि आपकी वाणी में आकर्षण, प्रभाव और गंभीरता आ रही है। 🌪️✨ 🌿 ध्यान विधि नेत्र बंद कर कल्पना करें कि माँ मातंगी हरे प्रकाश में आपके कंठ (विशुद्ध चक्र) में विराजमान हैं। उनकी वीणा से निकलती ध्वनि आपकी वाणी को दिव्य बना रही है। 🎶💚 मन ही मन कहें — “माँ, मेरी वाणी में सत्य, प्रभाव और सिद्धि दो।” 🙏 🌟 साधना के फल ✔️ वाणी में अद्भुत आकर्षण 🗣️✨ ✔️ संगीत, लेखन, भाषण में सिद्धि 🎼📖 ✔️ लोगों पर प्रभाव और सम्मोहन 🧲 ✔️ तंत्र, मंत्र और गूढ़ विद्या में प्रगति 🔮 ✔️ आत्मविश्वास और तेजस्विता 🔥 ⚠️ महत्वपूर्ण सावधानियाँ 🚫 साधना काल में झूठ, अहंकार, क्रोध से बचें 🚫 किसी को हानि पहुँचाने की भावना न रखें 🛑 भय या संशय आने पर साधना रोकें और गुरु मार्गदर्शन लें 🌺 समापन प्रार्थना या देवी सर्वभूतेषु मातंगी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ मंत्र सिद्ध यँत्र माला दीक्षा Contact 🙏🌸🌿
🌺🔱 स्वप्न मातंगी मंत्र साधना विधान 🔱🌺(गोपनीय साधना • स्वप्न-सिद्धि • आकर्षण • वाणी-प्रभाव • अंतःदृष्टि जागरण) ✨ स्वप्न मातंगी देवी – एक दिव्य परिचय ✨ स्वप्न मातंगी महाविद्या मातंगी का एक अत्यंत रहस्यमय और … Continue reading स्वप्न मातंगी मंत्र साधना→
माँ मातंगी: मौन से वाणी के सिंहासन तक तांत्रिक ज्ञान आगम और शास्त्र एक गहन सत्य प्रकट करते हैं: वाणी मात्र ध्वनि नहीं, बल्कि चेतना का कंपन है। यह अव्यक्त और प्रकट, मौन परम सत्ता … Continue reading मातंगी मंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना :- 1-महाविद्या मातंगी, महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। देवी निम्न वर्ग एवं जनजातिओ से सम्बंधित हैं। देवी का एक अन्य नाम उच्छिष्ट चांडालिनी भी हैं। देवी तंत्र क्रियाओं की अधिष्ठात्री … Continue reading मातंगी सम्मोहन मंत्र साधना→
महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच सभी के लिए उपयोगी होता है। मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या। वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं। यह सरस्वती … Continue reading मातंगी देवी यन्त्र -ताबीज -कवच→
मातंगी Matangi Devi Mantra Sadhana साधना विधि यह साधना मातंगी जयन्ती, मातंगी सिद्धि दिवस अथवा किसी भी सोमवार के दिन से शुरू की जा सकती है। यह साधना रात्रिकालीन है और इसे रात्रि में ९ … Continue reading मातंगी तंत्र मंत्र यंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना वर्तमान युग में, मानव जीवन के प्रारंभिक पड़ाव से अंतिम पड़ाव तक भौतिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है । व्यक्ति जब तक भौतिक जीवन का पूर्णता से निर्वाह नहीं … Continue reading मातंगी साधना Matangi Mantra→
तेल मातंगी प्रयोग (भूत-भविष्य दर्शन साधना) मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर चंद्र इनके तीन नेत्र हैं और यह … Continue reading तेल मांतगी भूत भविष्य दर्शन मंत्र→
Matangi Devi Haven yagha 🔥 विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे। … Continue reading मातंगी हवन 🔥 yagha→
मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। मनुष्यों को सर्व-सिद्धि-प्रददिव्य मातंगी-कवच अति उत्तम है, उस कवच को मुझसे कहिए। श्री ईश्वर उवाच … Continue reading मातंगी कवच→
मातंगी देवी तंत्र मंत्र साधना हवन Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग … Continue reading मातंगी Matangi Devi video→
मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर चंद्र इनके तीन नेत्र हैं और यह रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान हैं। इनकी साधना सुखमय गृहस्थ, पुरुषार्थ, ओजपूर्ण वाणी तथा गुणवान पति या पत्नी की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इनकी साधना वाममार्गी साधकों में अधिक प्रचलित हैं, किंतु सात्विक लोग भी दक्षिणमार्गी पद्धति से इनकी साधना करते हैं।
देवी का सम्बन्ध नाना प्रकार के तंत्र क्रियाओं से हैं। इंद्रजाल विद्या या जादुई शक्ति कि देवी प्रदाता हैं, वाक् सिद्धि, संगीत तथा अन्य ललित कलाओं में निपुण, सिद्ध विद्याओ से सम्बंधित हैं तथा अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। देवी, केवल मात्र वचन द्वारा त्रिभुवन में समस्त प्राणिओ तथा अपने घनघोर शत्रु को भी वश करने में समर्थ हैं, जिसे सम्मोहन क्रिया कहा जाता हैं। देवी सम्मोहन विद्या की अधिष्ठात्री हैं।
साधना विधी-विधान:-
साधना शुक्ल पक्ष के प्रथम दिवस पर रात्री मे 9 बजे प्रारंभ करे। साधना 11 दिन का है और 12 वे दिन चमेली के तेल से 100 माला मंत्र का आहुति भी देना है। इस साधना मे वस्त्र-आसन लाल ही रंग के होने चाहिए। माला रुद्राक्ष का हो और नित्य 100 माला जाप करना पडेगा । साधना काल मे 51 माला के बाद आप आराम कर सकते है परंतु उसके बाद बाकी मंत्र जाप करना होगा। मंत्र जाप के समय एक ताम्बे के कटोरे मे चमेली का तेल भरकर सामने रखना है और मंत्र जाप करते समय कटोरे मे भरकर रखे हुए तेल के तरफ देखकर जाप करें। तो कुछ दिनो बाद तेल मे मातंगी जी का चेहरा दिखाई देगा,उसके बाद जब मातंगी जी पुर्ण रुप मे दिखाई दे तो समज जाये “आपका साधना सफल हो गया है “,इस तरहा से साधना पुर्ण होता है। साधना सिद्धि के बाद आप कभी भी प्रयोग करके जो देखना चाहते हो वह देख सकते हो ।
om hreem kleem hoom teilam maatangyei darshay darshay phat swaahaa
साधना मे जो तेल इस्तेमाल किया हो उसे किसी कांच के बोटल मे सम्भालकर रखे,वह तेल प्रयोग करते समय काम मे आयेगा। हो सके तो साधना मे पुर्ण सफलता हेतु तेल मातंगी यंत्र को गले मे धारण करे ।
माँ मातंगी: मौन से वाणी के सिंहासन तक तांत्रिक ज्ञान आगम और शास्त्र एक गहन सत्य प्रकट करते हैं: वाणी मात्र ध्वनि … Continue reading मातंगी मंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना :- 1-महाविद्या मातंगी, महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। देवी निम्न वर्ग एवं जनजातिओ से सम्बंधित हैं। देवी … Continue reading मातंगी सम्मोहन मंत्र साधना→
Matangi Devi Haven yagha 🔥 विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या … Continue reading मातंगी हवन 🔥 yagha→
मातंगी तर्पण मार्जन साधक गुरुआज्ञानुसार जप करें। जप पू्र्ण होने के बाद महुए के फूल व लकड़ी के दशांस होम कर तर्पन … Continue reading मातंगी तर्पण मार्जन→
मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। मनुष्यों को … Continue reading मातंगी कवच→
मातंगी देवी तंत्र मंत्र साधना हवन Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र … Continue reading मातंगी Matangi Devi video→
विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे।
फल- मधुयुक्त महुए के फूल व लकड़ी से हवन करने पर वशीकरण का प्रयोग सिद्ध होता है। मल्लिका फूल के होम से योग सिद्धि, बेल फूल के हवन से राज्य प्राप्ति, पलास के पत्ते व फूल के हवन में जन वशीकरण, गिलोय के हवन से रोगनाश, थोड़े से नीम के टुकड़ों व चावल के हवन से धन प्राप्ति, नीम के तेल से भीगे नमक से होम करने पर शत्रुनाश, केले के फल के हवन से समस्त कामनाओं की सिद्धि होती है। खैर की लकड़ी से हवन कर मधु से भीगे नमक के पुतले के दाहिने पैर की ओर हवन की अग्नि में तपाने से शत्रु वश में होता है।
हवन विधि- दही मिश्रित पीली सरसो व चावल से हवन करने पर राजा-मंत्री सभी वश में हो जाते हैं।
खीर के हवन से विद्या प्राप्ति तथा मधु व घी युक्त पान के पत्तों के हवन से महासमृद्धि की प्राप्ति होती है।
साधक गुरुआज्ञानुसार जप करें। जप पू्र्ण होने के बाद महुए के फूल व लकड़ी के दशांस होम कर तर्पन व मार्जन करें।
मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे … Continue reading मातंगी कवच→
मातंगिनी देवी मेरे मस्तक की रक्षा करे, भुवनेश्वरी दो नेत्रों की, तोतला देवी दो कर्णों की, त्रिपुरा देवी मेरे बदन-मण्डल की, महा-माया मेरे कण्ठ की, माहेश्वरी मेरे हृदय की, त्रिपुरा दोनों पार्श्वों की और कामेश्वरी मेरे गुह्य-देश की रक्षा करे। चण्डी दोनों ऊरु की, रति-प्रिया जंघा की, महा-माया दोनों चरणों की और कुलेश्वरी मेरे सर्वांग की रक्षा करे। वैष्णवी सतत मेरे अंग-प्रत्यंग की रक्षा करे, मातंगी ब्रह्म-रन्घ्र में अवस्थान करके मेरी रक्षा करे। महा-पिशाचिनी बराबर मेरे ललाट की रक्षा करे, सुमुखी चक्षु की रक्षा करे, देवी नासिका की रक्षा करे। महा-पिशाचिनी वदन के पश्चाद्-भाग की रक्षा करे, लज्जा मेरे दन्त की और सम्मार्जनी-हस्ता मेरे दो ओष्ठों की रक्षा करे। हे महा-देवि। तीन ‘ठं’ मेरे चिबुक और कण्ठ की और तीन ‘ठं’ सदा मेरे हृदय-देश की रक्षा करे। लीला माँ मेरे नाभि-देश की रक्षा करे, कालिका चक्षु की रक्षा करे, चामुण्डा जठर की रक्षा करे और कात्यायनी लिंग की रक्षा करे। उग्र-तारा मेरे गुह्य की, अम्बिका मेरे पद-द्वय की, शर्वाणी मेरे दोनों बाहुओं की और चण्ड-भूषण मेरे हृदय-देश की रक्षा करे। मातृका रसना की रक्षा करे, पुष्टिका पूर्व-दिशा की तरफ, विजया दक्षिण-दिशा की तरफ और मेधा पश्चिम दिशा की तरफ मेरी रक्षा करे। श्रद्धा नैऋत्य-कोण की तरफ, लक्ष्मणा वायु-कोण की तरफ, शुभ-कारिणी मातंगी देवी ईशान-कोण की तरफ, सुवेशा अग्नि-कोण की तरफ, बाला उत्तर दिक् की तरफ और देव-वृन्द की हित-कारिणी महा-देवी ऊर्ध्व-दिक् की तरफ रक्षा करे। विश्व-रुपिणि वशिनी सर्वदा पाताल में मेरी रक्षा करे। “ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंगिन्यै फट् स्वाहा” – यह सार्द्धेकादश-वर्ण-मन्त्रमयी मातंगी सतत सकल स्थानों में मेरी रक्षा करे।
फल-श्रुति
इति ते कथितं देवि । गुह्यात् गुह्य-तरं परमं । त्रैलोक्य-मंगलं नाम, कवचं देव-दुर्लभम् ॥ यः इदं प्रपठेत् नित्यं, जायते सम्पदालयं । परमैश्वर्यमतुलं, प्राप्नुयान्नात्र संशयः ॥ गुरुमभ्यर्च्य विधि-वत्, कवचं प्रपठेद् यदि । ऐश्वर्यं सु-कवित्वं च, वाक्-सिद्धिं लभते ध्रुवम् ॥ नित्यं तस्य तु मातंगी, महिला मंगलं चरेत् । ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च, ये देवा सुर-सत्तमाः ॥ ब्रह्म-राक्षस-वेतालाः, ग्रहाद्या भूत-जातयः । तं दृष्ट्वा साधकं देवि । लज्जा-युक्ता भवन्ति ते ॥ कवचं धारयेद् यस्तु, सर्वां सिद्धि लभेद् ध्रुवं । राजानोऽपि च दासत्वं, षट्-कर्माणि च साधयेत् ॥ सिद्धो भवति सर्वत्र, किमन्यैर्बहु-भाषितैः । इदं कवचमज्ञात्वा, मातंगीं यो भजेन्नरः ॥ झल्पायुर्निधनो मूर्खो, भवत्येव न संशयः । गुरौ भक्तिः सदा कार्या, कवचे च दृढा मतिः ॥हे देवि। तुमसे मैंने यह “त्रैलोक्य-मोहन” नाम का अति गुह्य देव दुर्लभ कवच कहा है। जो नित्य इसका पाठ करता है, वह सम्पत्ति का आधार होता है और अतुल परमैश्वर्य प्राप्त करता है, इसमें संशय नहीं है। यथा-विधि गुरु-पूजा करके उक्त कवच का पाठ करने से ऐश्वर्य, सु-कवित्व और वाक्-सिद्धि निश्चय ही प्राप्त की जा सकती है। मातंगी उसे नित्य नारी-संग दिलाती है। हे देवि। ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर, दूसरे प्रधान देव-वृन्द, ब्रह्म-राक्षस, वैताल, ग्रह आदि भूत-गण उस साधक को देखकर लज्जित होते हैं। जो व्यक्ति इस कवच को धारण करता है, वह सर्व-सिद्धियाँ लाभ करता है। नृपति-गण उसका दासत्व करते हैं। वह षट्-कर्म साधन कर सकता है। अधिक क्या, वह सर्वत्र सिद्ध होता है। इस कवच को न जानकर, जो मातंगी की पूजा करता है, वह अल्पायु, धन-हीन और मूर्ख होता है। गुरु-भक्ति सर्वदा परमावश्यक है। इस कवच पर भी दृढ़ मति अर्थात् पूर्ण विश्वास रखना परम कर्तव्य है। फिर मातंगी देवी सर्व-सिद्धियाँ प्रदान करती है।
माँ मातंगी: मौन से वाणी के सिंहासन तक तांत्रिक ज्ञान आगम और शास्त्र एक गहन सत्य प्रकट करते हैं: वाणी मात्र ध्वनि नहीं, बल्कि चेतना का कंपन है। … Continue reading मातंगी मंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना :- 1-महाविद्या मातंगी, महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। देवी निम्न वर्ग एवं जनजातिओ से सम्बंधित हैं। देवी का एक अन्य नाम उच्छिष्ट चांडालिनी … Continue reading मातंगी सम्मोहन मंत्र साधना→
महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच सभी के लिए उपयोगी होता है। मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या। वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री … Continue reading मातंगी देवी यन्त्र -ताबीज -कवच→
मातंगी Matangi Devi Mantra Sadhana साधना विधि यह साधना मातंगी जयन्ती, मातंगी सिद्धि दिवस अथवा किसी भी सोमवार के दिन से शुरू की जा सकती है। यह साधना … Continue reading मातंगी तंत्र मंत्र यंत्र साधना→
मातंगी मंत्र साधना वर्तमान युग में, मानव जीवन के प्रारंभिक पड़ाव से अंतिम पड़ाव तक भौतिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है । व्यक्ति जब तक … Continue reading मातंगी साधना Matangi Mantra→
तेल मातंगी प्रयोग (भूत-भविष्य दर्शन साधना) मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर … Continue reading तेल मांतगी भूत भविष्य दर्शन मंत्र→
Matangi Devi Haven yagha 🔥 विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर … Continue reading मातंगी हवन 🔥 yagha→
मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। मनुष्यों को सर्व-सिद्धि-प्रददिव्य मातंगी-कवच अति उत्तम है, उस … Continue reading मातंगी कवच→
मातंगी देवी तंत्र मंत्र साधना हवन Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना … Continue reading मातंगी Matangi Devi video→
आरती माँ मातंगी देवी जी की🌞ओम जय मातंगी मा (2) द्विजवर सुखकर सगी, धमांधुरा नदी ओम जयो जयो मा मातंगी मा विप्रमात तुं विष्णुशक्ति तुं द्विज्ज्न उध्धरती मा…(2) दया द्रष्टि करी प्रीते (2) द्विकुल भय हरती… ओम पंचावन पर स्वार, अष्टदश भुजधारी मा…(2) आयुध चक्र गदादि (2) प्रभुमय बलधारी… ओम निगम नीतिना वचन प्रमाणे, तुं मा धर्मतणी मा…(2) धर्मारण्यनी देवी (2) धर्मधरा वरती… ओम आर्यावर्तमां धर्म स्थापवा, अधर्मने पाप हरवा मा…(2) सितापति श्री रामे (2) श्रेय सकल करवा… ओम विष्णु विरंची शिवजी, तव अर्चन करता मा…(2) धर्म विद्यात्री तुजने (2) स्थापी शुभ करता… ओम शोभे सुंदर रूप, रत्न जडित पटथी मा…(2) स्मित मुख कमले ज्योति (2) करूणा द्रष्टिथी… ओम धर्मक्षेत्रनी अधिदेवी तुं मातंगी लक्ष्मी मा…(2) हरि नीकटे नीत वसती (2) तुं साक्षात लक्ष्मी मा…(2) हरिप्रिया तुं सत्य विभुति लक्ष्मीरूप धरा मा…(2) तव पद गुर्जर पावन (2) दश दिश वसुंधरा… ओम मोढेश्वरी तुं मोढ ज्ञातिनी काम दुधा माता मा…(2) मोढवृक्षना शीशुनी (2) तुं सर्जक माता… ओम त्रिगुणा तत्व मयी, चींतामणी फूलदा मा…(2) धर्म क्षेत्र धर्मेश्वरी (2) धर्मधरा वरदा… ओम यर्जु विधिथी पूजा, तुज विप्रो करता मा…(2) साम रूचायो भणता (2) प्रसन्नता वरदा…ओम आसुर विधि ने विप्र मा आरती जयकारीपूजन थाल ने विधि (2) तुज पर वारी…ओम मोढेश्वरीनी आरती जे कोई गाशे, मा जे भावे गाशे, दु:ख दरिद्र पापहरता, जन्म सफल थाशे…ओम
💥आप सभी भक्तों को वैशाख माष शुक्ल पक्ष अक्षय तृतीया तिथि परशुराम जयंती माँ मातंगी जयंती अन्नपूर्णा माता जयंती श्री मातंगी जयंती गंगा अवतरण की हार्दिक शुभकामनाएँ💥 💥शुभ भौमवार💥जय मातंगी माँ💥