स्वप्न मातंगी मंत्र साधना

🌺🔱 स्वप्न मातंगी मंत्र साधना विधान 🔱🌺
(गोपनीय साधना • स्वप्न-सिद्धि • आकर्षण • वाणी-प्रभाव • अंतःदृष्टि जागरण)

✨ स्वप्न मातंगी देवी – एक दिव्य परिचय ✨

स्वप्न मातंगी महाविद्या मातंगी का एक अत्यंत रहस्यमय और शक्तिशाली स्वरूप हैं। ये साधक को स्वप्नों के माध्यम से संकेत, ज्ञान, उत्तर और मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। जिन पर स्वप्न मातंगी की कृपा होती है, उनके स्वप्न केवल कल्पना नहीं रहते, बल्कि सिद्ध संकेत और भविष्यबोध का माध्यम बन जाते हैं।
यह साधना विशेष रूप से तांत्रिक, मंत्र-साधक, ज्योतिषी, लेखक, वक्ता और गूढ़ साधकों के लिए अत्यंत फलदायी मानी गई है।

🌸 स्वप्न मातंगी मंत्र (मूल मंत्र) 🌸

।। ॐ नमः स्वप्न मातंगिनि सत्यभाषिणि स्वप्नं दर्शय दर्शय स्वाहा ।।
   ⚜️⚜️लौकिक मंत्र ⚜️⚜️
ॐ ह्रीं ऐं स्वप्न मातंग्यै नमः॥
👉 यह मंत्र स्वप्नों को जागृत करने, देवी से संवाद और अंतःकरण को सूक्ष्म बनाने में सहायक है।

🔱⚜️ मंत्र की महिमा⚜️ 🔱
📿 यह मंत्र साधक को
• दिव्य स्वप्न  • संकेतात्मक उत्तर
• वाणी में आकर्षण • अंतर्ज्ञान की तीव्रता
• गुप्त ज्ञान की प्राप्ति प्रदान करता है।
कहा जाता है –
“जहाँ स्वप्न मातंगी प्रकट होती हैं, वहाँ अज्ञान का अंधकार स्वयं मिट जाता है।”
मंत्र साधना विधि मातंगी देवी का मंत्र सिद्ध यँत्र माला ले कर हीं साधना करनी चाहिए।
सर्वप्रथम यँत्र स्थापना करें उस के बाद गंगा जल से स्नान कर धुप दीप लगा कर प्राम्भ करें।

⚜️🕉️ विनियोग  🕉️⚜️
ॐ अस्य श्री स्वप्न मातंगी मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः
गायत्री छन्दः स्वप्न मातंगी देवता
ह्रीं बीजम् ऐं शक्तिः नमः कीलकम्।
स्वप्न-सिद्धि, ज्ञान-प्राप्ति, आकर्षण एवं वाणी-प्रभाव सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः॥

🔸⚜️⚜️ न्यास (संक्षेप) 🔸⚜️⚜️
करन्यासः
ॐ ह्रीं अंगुष्ठाभ्यां नमः
ॐ ऐं तर्जनीभ्यां नमः
ॐ ह्रीं मध्याभ्यां नमः
ॐ ऐं अनामिकाभ्यां नमः
ॐ नमः कनिष्ठिकाभ्यां नमः
हृदयन्यासः
ॐ ह्रीं हृदयाय नमः
ॐ ऐं शिरसे स्वाहा
ॐ नमः शिखायै वषट्

,⚜️⚜️🌺 ध्यान मंत्र 🌺⚜️⚜️
रक्तवर्णां त्रिनेत्रां मातंगी स्वप्नरूपिणीम्।
वीणापुस्तकहस्तां च ध्यायेत् स्वप्ने प्रबोधिनीम्॥
👉 साधक कल्पना करे कि देवी नील-रक्त आभा से युक्त हैं, वीणा धारण किए हुए, और स्वप्न में प्रकट होकर संकेत दे रही हैं।
⚜️🔥 साधना संकल्प  🔥⚜️
मम सर्वस्वप्न-सिद्धि-ज्ञान-प्राप्त्यर्थं
स्वप्न मातंगी प्रसाद सिद्ध्यर्थं
अहं एतत् मंत्र जपं करिष्ये॥

⚜️📿 जप विधान 📿⚜️
🔢 जप संख्या – 11,000 / 21,000 (विशेष सिद्धि हेतु 1,25,000)
⏰ समय – रात्रि 10 बजे के बाद या ब्रह्ममुहूर्त

⚜️ आसन – काला ऊन, कुश या लाल वस्त्र
📿 माला – रुद्राक्ष या स्फटिक (विशेष: नील माला)

⚜️🌙 साधना की विशेष विधि ⚜️🌙
✔ साधना से पूर्व मौन धारण करें
✔ जप के बाद बिना किसी से बात किए सो जाएँ
✔ शयन से पूर्व देवी से प्रश्न मन में रखें
✔ स्वप्न को प्रातः लिख लें

🍃 आहार-विहार नियम 🍃
✔ सात्त्विक भोजन✔ अल्पाहार
✔ रात्रि में फल या दूध
❌ मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज निषिद्ध

🚫 परिहार व संयम 🚫
❌ क्रोध❌ असत्य❌ व्यभिचार
❌ अनावश्यक बोलना

⚠️ सावधानियाँ ⚠️
🔺 यह साधना गोपनीय रखें
🔺 मंत्र का उपहास न करें
🔺 श्रद्धा और विश्वास अनिवार्य है
🔺 गुरु मार्गदर्शन में करना सर्वोत्तम

🌟 साधना फल एवं उपयोगिता 🌟
✨ स्वप्न में देवी दर्शन✨ भविष्य संकेत
✨ निर्णय क्षमता में वृद्धि✨ वाणी में आकर्षण
✨ गुप्त विद्याओं में प्रगति
🙏 जो साधक श्रद्धा, संयम और विश्वास से इस साधना को करता है, स्वप्न मातंगी स्वयं मार्गदर्शक बनकर प्रकट होती हैं।
🌺✨
यदि यह दिव्य साधना-विधान आपको उपयोगी लगा हो तो
🙏 लाइक करें | ✍️ कमेंट करें |
✨🔱 जय स्वप्न मातंगी 🔱✨
Contact for Mantra sidh yantra mala diksha hawan.

  • स्वप्न मातंगी मंत्र साधना
    🌺🔱 स्वप्न मातंगी मंत्र साधना विधान 🔱🌺(गोपनीय साधना • स्वप्न-सिद्धि • आकर्षण • वाणी-प्रभाव • अंतःदृष्टि जागरण) ✨ स्वप्न मातंगी देवी – एक दिव्य परिचय ✨ स्वप्न मातंगी महाविद्या मातंगी का एक अत्यंत रहस्यमय और शक्तिशाली स्वरूप हैं। ये … Continue reading स्वप्न मातंगी मंत्र साधना
  • मातंगी मंत्र साधना
    माँ मातंगी: मौन से वाणी के सिंहासन तक तांत्रिक ज्ञान  आगम और शास्त्र एक गहन सत्य प्रकट करते हैं: वाणी मात्र ध्वनि नहीं, बल्कि चेतना का कंपन है। यह अव्यक्त और प्रकट, मौन परम सत्ता और जीवंत जगत के … Continue reading मातंगी मंत्र साधना
  • मातंगी सम्मोहन मंत्र साधना
    मातंगी मंत्र साधना :- 1-महाविद्या मातंगी, महाविद्याओं में नवें स्थान पर अवस्थित हैं। देवी निम्न वर्ग एवं जनजातिओ से सम्बंधित हैं। देवी का एक अन्य नाम उच्छिष्ट चांडालिनी भी हैं। देवी तंत्र क्रियाओं की अधिष्ठात्री हैं। इंद्रजाल या जादुई … Continue reading मातंगी सम्मोहन मंत्र साधना
  • मातंगी देवी यन्त्र -ताबीज -कवच
    महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच सभी के लिए उपयोगी होता है। मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या। वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं। यह सरस्वती का ही प्रखर रूप … Continue reading मातंगी देवी यन्त्र -ताबीज -कवच
  • मातंगी तंत्र मंत्र यंत्र साधना
    मातंगी Matangi Devi Mantra Sadhana साधना विधि यह साधना मातंगी जयन्ती, मातंगी सिद्धि दिवस अथवा किसी भी सोमवार के दिन से शुरू की जा सकती है। यह साधना रात्रिकालीन है और इसे रात्रि में ९ बजे के बाद शुरु … Continue reading मातंगी तंत्र मंत्र यंत्र साधना
  • मातंगी साधना Matangi Mantra
    मातंगी मंत्र साधना वर्तमान युग में, मानव जीवन के प्रारंभिक पड़ाव से अंतिम पड़ाव तक भौतिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है । व्यक्ति जब तक भौतिक जीवन का पूर्णता से निर्वाह नहीं कर लेता है, तब … Continue reading मातंगी साधना Matangi Mantra
  • तेल मांतगी भूत भविष्य दर्शन मंत्र
    तेल मातंगी प्रयोग (भूत-भविष्य दर्शन साधना) मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर चंद्र इनके तीन नेत्र हैं और यह रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान … Continue reading तेल मांतगी भूत भविष्य दर्शन मंत्र
  • मातंगी हवन 🔥 yagha
    Matangi Devi Haven yagha 🔥 विधि- विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे। फल- मधुयुक्त महुए के … Continue reading मातंगी हवन 🔥 yagha
  • मातंगी तर्पण मार्जन
    मातंगी तर्पण मार्जन साधक गुरुआज्ञानुसार जप करें। जप पू्र्ण होने के बाद महुए के फूल व लकड़ी के दशांस होम कर तर्पन व मार्जन करें।
  • मातंगी कवच
    मातंगी कवच श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर।मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री-देवी ने कहा – हे महादेव। हे सुरेश्वर। मनुष्यों को सर्व-सिद्धि-प्रददिव्य मातंगी-कवच अति उत्तम है, उस कवच को मुझसे कहिए। श्री ईश्वर उवाच श्रृणु देवि। प्रवक्ष्यामि, मातंगी-कवचं … Continue reading मातंगी कवच
  • मातंगी आरती /गायत्री मंत्र/वीडियो
    मातंगी आरती /गायत्री आरती माँ मातंगी देवी जी की🌞ओम जय मातंगी मा (2)द्विजवर सुखकर सगी, धमांधुरा नदीओम जयो जयो मा मातंगी माविप्रमात तुं विष्णुशक्ति तुं द्विज्ज्न उध्धरती मा…(2)दया द्रष्टि करी प्रीते (2) द्विकुल भय हरती… ओमपंचावन पर स्वार, अष्टदश … Continue reading मातंगी आरती /गायत्री मंत्र/वीडियो
  • मातंगी Matangi Devi video
    मातंगी देवी तंत्र मंत्र साधना हवन Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग भैरवी मंत्र साधना छिन्नमस्ता … Continue reading मातंगी Matangi Devi video

मातंगी साधना Matangi Mantra



मातंगी मंत्र साधना

वर्तमान युग में, मानव जीवन के प्रारंभिक पड़ाव से अंतिम पड़ाव तक भौतिक आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है । व्यक्ति जब तक भौतिक जीवन का पूर्णता से निर्वाह नहीं कर लेता है, तब तक उसके मन में आसक्ति का भाव रहता ही है और जब इन इच्छाओ की पूर्ति होगी,तभी वह आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उन्नति कर सकता है । मातंगी महाविद्या साधना एक ऐसी साधना है जिससे आप भौतिक जीवन को भोगते हुए आध्यात्म की उँचाइयो को छु सकते है । मातंगी महाविद्या साधना से साधक को पूर्ण गृहस्थ सुख ,शत्रुओ का नाश, भोग विलास,आपार सम्पदा,वाक सिद्धि, कुंडली जागरण ,आपार सिद्धियां, काल ज्ञान ,इष्ट दर्शन आदि प्राप्त होते ही है
इसीलिए ऋषियों ने कहा है —मातंगी मेवत्वं पूर्ण मातंगी पुर्णतः उच्यते;
इससे यह स्पष्ट होता है की मातंगी साधना पूर्णता की साधना है । जिसने माँ मातंगी को सिद्ध कर लिया फिर उसके जीवन में कुछ अन्य सिद्ध करना शेष नहीं रह जाता । माँ मातंगी आदि सरस्वती है,जिसपे माँ मातंगी की कृपा होती है उसे स्वतः ही सम्पूर्ण वेदों, पुरानो, उपनिषदों आदि का ज्ञान हो जाता है ,उसकी वाणी में दिव्यता आ जाती है ,फिर साधक को मंत्र एवं साधना याद करने की जरुरत नहीं रहती ,उसके मुख से स्वतः ही धाराप्रवाह मंत्र उच्चारण होने लगता है ।
जब जब साधक बोलता है तो हजारो लाखो की भीड़ मंत्र मुग्ध सी उसके मुख से उच्चारित वाणी को सुनती रहती है । साधक की ख्याति संपूर्ण ब्रह्माण्ड में फैल जाती है ।कोई भी उससे शास्त्रार्थ में विजयी नहीं हो सकता,वह जहाँ भी जाता है विजय प्राप्त करता ही है । मातंगी साधना से वाक सिद्धि की प्राप्ति होते है, प्रकृति साधक से सामने हाँथ जोड़े खडी रहती है, साधक जो बोलता है वो सत्य होता ही है । माँ मातंगी साधक को वो विवेक प्रदान करती है की फिर साधक पर कुबुद्धि हावी नहीं होती,उसे दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है और ब्रह्माण्ड के समस्त रहस्य साधक के सामने प्रत्यक्ष होते ही है ।
भगवती मातंगी को उच्छिष्ट चाण्डालिनी भी कहते है,इस रूप में माँ साधक के समस्त शत्रुओ एवं विघ्नों का नाश करती है,फिर साधक के जीवन में ग्रह या अन्य बाधा का कोई असर नहीं होता । जिसे संसार में सब ठुकरा देते है,जिसे संसार में कही पर भी आसरा नहीं मिलता उसे माँ उच्छिष्ट चाण्डालिनी अपनाती है,और साधक को वो शक्ति प्रदान करती है जिससे ब्रह्माण्ड की समस्त सम्पदा साधक के सामने तुच्छ सी नजर आती है ।
महर्षि विश्वमित्र ने यहाँ तक कहा है की (मातंगी साधना में बाकि नव महाविद्याओ का समावेश स्वतः ही हो गया है )। अतः आप भी माँ मातंगी की साधना को करें जिससे आप जीवन में पूर्ण बन सके ।

साधना विधि

साधना सोमवार के दिन,पच्छिम दिशा मे मुख करके करना है।इस मे भगवती मातंगी मंत्र सिद्व माला और यंत्रमातंगी यंत्र माला लेकर ही साधना शुरु करें। वस्त्र आसन लाल रंग का हो,साधना रात्रि मे नौ बजे के बाद करे। नित्य २१ माला जाप ४१ दिनो तक करना चाहिए। देवि मातंगी वशीकरण की महाविद्या मानी जाती है,इसी मंत्र साधना से वशीकरण क्रिया भी सम्भव है। ४१ वे दिन कम से कम घी की १०८ आहूति हवन मे अर्पित करे। इस तरह से साधना पुर्ण होती है।४१ वे दिन भोजपत्र पर बनाये हुए यंत्र को चांदि के तावीज मे डालकर पहेन ले,यह एक दिव्य कवच माना जाता है।अक्षय तृतीया के दिन ”मातंगी जयंती” होती है और वैशाख पूर्णिमा ”मातंगी सिद्धि दिवस” होता है. ,इन बारहदिनों मे आप चाहे जितना मंत्र जाप कर सकते है ।

विनियोग:–अस्य मंत्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषि विराट् छन्दः मातंगी देवता ह्रीं बीजं हूं शक्तिः क्लीं कीलकं सर्वाभीष्ट सिद्धये जपे विनियोगः ।
ऋष्यादिन्यास :–ॐ दक्षिणामूर्ति ऋषये नमः शिरसी विराट् छन्दसे नमः मुखे मातंगी देवतायै नमः हृदि ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये हूं शक्तये नमः पादयोः क्लीं कीलकाय नमः नाभौ विनियोगाय नमः सर्वांगे
करन्यासः–ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमःॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमःॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः

हृदयादिन्यास:–ॐ ह्रां हृदयाय नमः ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा ॐ ह्रूं शिखायै वषट् ॐ ह्रैं कवचाय हूं ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् ॐ ह्रः अस्त्राय फट्
ध्यानः–श्यामांगी शशिशेखरां त्रिनयनां वेदैः करैर्विभ्रतीं, पाशं खेटमथांकुशं दृढमसिं नाशाय भक्तद्विषाम् ।
रत्नालंकरणप्रभोज्जवलतनुं भास्वत्किरीटां शुभां ,मातंगी मनसा स्मरामि सदयां सर्वाथसिद्धिप्रदाम् ।।

मंत्र- ॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्यै फट स्वाह।।

ये मंत्र साधना अत्यंत तीव्र मंत्र है । मातंगी महाविद्या साधना प्रयोग सर्वश्रेष्ठ साधना है जो साधक के जीवन को भाग्यवान बना देती है। मंत्र जाप के बाद अवश्य ही कवच का एक पाठ करे।

Matngi devi

🌺 माँ मातंगी देवी साधना 🌺

माँ मातंगी दशमहाविद्याओं में नवमी महाविद्या हैं। वे वाणी, संगीत, तंत्र, विद्या, वाक्-सिद्धि, सम्मोहन और अदृश्य प्रभाव की अधिष्ठात्री देवी हैं। माँ मातंगी की साधना विशेष रूप से उन साधकों के लिए फलदायी मानी जाती है जो बुद्धि, प्रभाव, वाणी की शक्ति, रचनात्मकता और गूढ़ ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। 🌿✨
🔱 माँ मातंगी का स्वरूप
माँ मातंगी का वर्ण श्याम-हरित (गहरा हरा) होता है। वे वीणा धारण करती हैं, जो संगीत और वाणी की सिद्धि का प्रतीक है। उनके चार भुजाएँ होती हैं—एक में वीणा, एक में खड्ग, एक में खप्पर और एक वरद मुद्रा में। वे श्मशान, उपेक्षित स्थानों और एकांत में विशेष रूप से शीघ्र प्रसन्न होती हैं। 🌑🎶
🕉️ साधना का श्रेष्ठ समय
🌙 अमावस्या, नवमी तिथि, या बुधवार
🌌 रात्रि 11:30 से 2:30 (निशा काल)
🪔 एकांत स्थान या साधना कक्ष
🪔 साधना की तैयारी
स्नान कर हरे या नीले वस्त्र धारण करें 👘
हरे आसन (कुश या ऊनी) पर बैठें 🌿
सामने माँ मातंगी का चित्र या यंत्र स्थापित करें 🖼️
दीपक में तिल का तेल जलाएँ 🪔
नैवेद्य में उच्छिष्ट अन्न का प्रतीक (केला, गुड़, चावल) रखें 🍌🍚
⚠️ माँ मातंगी उच्छिष्ट-प्रिय हैं, अतः यह साधना सामान्य पूजा से भिन्न होती है।
📿 माँ मातंगी साधना मंत्र
(लेखक: रामकालिशास्त्री)
🌸 मूल मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं मातंग्यै फट् स्वाहा॥
🔮📿🔥
🌸 विशेष वाक्-सिद्धि मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवति मातंग्यै सर्ववाक् सिद्धिं देहि देहि स्वाहा॥
🗣️✨📜
🌸 तांत्रिक बीज मंत्र
ॐ क्लीं ह्रीं मातंगे फट्॥
⚡🕉️🖤
🔁 जप विधि
📿 माला: रुद्राक्ष या हरे हकीक
🔢 जप संख्या: 108 × 11 दिन या 21 माला प्रतिदिन
🧘‍♂️ ध्यान: माँ मातंगी को हरे प्रकाश में ध्यान करें
🫀 श्वास-प्रश्वास स्थिर रखें
हर जप के साथ अनुभव होगा कि आपकी वाणी में आकर्षण, प्रभाव और गंभीरता आ रही है। 🌪️✨
🌿 ध्यान विधि
नेत्र बंद कर कल्पना करें कि माँ मातंगी हरे प्रकाश में आपके कंठ (विशुद्ध चक्र) में विराजमान हैं। उनकी वीणा से निकलती ध्वनि आपकी वाणी को दिव्य बना रही है। 🎶💚
मन ही मन कहें —
“माँ, मेरी वाणी में सत्य, प्रभाव और सिद्धि दो।” 🙏
🌟 साधना के फल
✔️ वाणी में अद्भुत आकर्षण 🗣️✨
✔️ संगीत, लेखन, भाषण में सिद्धि 🎼📖
✔️ लोगों पर प्रभाव और सम्मोहन 🧲
✔️ तंत्र, मंत्र और गूढ़ विद्या में प्रगति 🔮
✔️ आत्मविश्वास और तेजस्विता 🔥
⚠️ महत्वपूर्ण सावधानियाँ
🚫 साधना काल में झूठ, अहंकार, क्रोध से बचें
🚫 किसी को हानि पहुँचाने की भावना न रखें
🛑 भय या संशय आने पर साधना रोकें और गुरु मार्गदर्शन लें
🌺 समापन प्रार्थना
या देवी सर्वभूतेषु मातंगी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मंत्र सिद्ध यँत्र माला दीक्षा Contact
🙏🌸🌿



।। मातंगी कवच।।

श्रीदेव्युवाच :–साधु-साधु महादेव ! कथयस्व सुरेश्वर !
मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ।।
श्री ईश्वर उवाच :–श्रृणु देवि ! प्रवक्ष्यामि, मातंगी-कवचं शुभं ।
दगोपनीयं महा-देवि ! मौनी जापं समाचरेत् ।।
विनियोगः-ॐ अस्य श्रीमातंगी-कवचस्य श्री दक्षिणा-मूर्तिः ऋषिः । विराट् छन्दः । श्रीमातंगी देवता । चतुर्वर्ग-सिद्धये जपे विनियोगः ।

ऋष्यादि-न्यासः-श्री दक्षिणा-मूर्तिः ऋषये नमः शिरसि -विराट् छन्दसे नमः मुखे ।श्रीमातंगी देवतायै नमः हृदि ।
चतुर्वर्ग-सिद्धये जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।

मूल_कवच_स्तोत्र

ॐ शिरो मातंगिनी पातु, भुवनेशी तु चक्षुषी ।तोडला कर्ण-युगलं, त्रिपुरा वदनं मम ।।पातु कण्ठे महा-माया, हृदि माहेश्वरी तथा ।त्रि-पुष्पा पार्श्वयोः पातु, गुदे कामेश्वरी मम ।।ऊरु-द्वये तथा चण्डी, जंघयोश्च हर-प्रिया ।महा-माया माद-युग्मे, सर्वांगेषु कुलेश्वरी ।।अंग प्रत्यंगकं चैव, सदा रक्षतु वैष्णवी ।ब्रह्म-रन्घ्रे सदा रक्षेन्, मातंगी नाम-संस्थिता
रक्षेन्नित्यं ललाटे सा, महा-पिशाचिनीति च । नेत्रयोः सुमुखी रक्षेत्, देवी रक्षतु नासिकाम् ।।महा-पिशाचिनी पायान्मुखे रक्षतु सर्वदा ।लज्जा रक्षतु मां दन्तान्, चोष्ठौ सम्मार्जनी-करा ।।चिबुके कण्ठ-देशे च, ठ-कार-त्रितयं पुनः
स-विसर्ग महा-देवि ! हृदयं पातु सर्वदा ।।नाभि रक्षतु मां लोला, कालिकाऽवत् लोचने ।उदरे पातु चामुण्डा, लिंगे कात्यायनी तथा ।।उग्र-तारा गुदे पातु, पादौ रक्षतु चाम्बिका ।भुजौ रक्षतु शर्वाणी, हृदयं चण्ड-भूषणा ।।जिह्वायां मातृका रक्षेत्, पूर्वे रक्षतु पुष्टिका ।विजया दक्षिणे पातु, मेधा रक्षतु वारुणे ।।नैर्ऋत्यां सु-दया रक्षेत्, वायव्यां पातु लक्ष्मणा ।ऐशान्यां रक्षेन्मां देवी, मातंगी शुभकारिणी ।।रक्षेत् सुरेशी चाग्नेये, बगला पातु चोत्तरे ।ऊर्घ्वं पातु महा-देवि ! देवानां हित-कारिणी ।।पाताले पातु मां नित्यं, वशिनी विश्व-रुपिणी ।प्रणवं च ततो माया, काम-वीजं च कूर्चकं ।।मातंगिनी ङे-युताऽस्त्रं, वह्नि-जायाऽवधिर्पुनः ।सार्द्धेकादश-वर्णा सा, सर्वत्र पातु मां सदा ।।

तेल मांतगी भूत भविष्य दर्शन मंत्र

तेल मातंगी प्रयोग (भूत-भविष्य दर्शन साधना)


मातंगी नौंवी महाविद्या है। ‘मतंग’ शिव का नाम है और मातंगी उनकी शक्ति है। मातंगी देवी श्याम वर्णा है। इनके मस्तक पर चंद्र इनके तीन नेत्र हैं और यह रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान हैं। इनकी साधना सुखमय गृहस्थ, पुरुषार्थ, ओजपूर्ण वाणी तथा गुणवान पति या पत्नी की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इनकी साधना वाममार्गी साधकों में अधिक प्रचलित हैं, किंतु सात्विक लोग भी दक्षिणमार्गी पद्धति से इनकी साधना करते हैं।

देवी का सम्बन्ध नाना प्रकार के तंत्र क्रियाओं से हैं। इंद्रजाल विद्या या जादुई शक्ति कि देवी प्रदाता हैं, वाक् सिद्धि, संगीत तथा अन्य ललित कलाओं में निपुण, सिद्ध विद्याओ से सम्बंधित हैं तथा अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। देवी, केवल मात्र वचन द्वारा त्रिभुवन में समस्त प्राणिओ तथा अपने घनघोर शत्रु को भी वश करने में समर्थ हैं, जिसे सम्मोहन क्रिया कहा जाता हैं। देवी सम्मोहन विद्या की अधिष्ठात्री हैं।

साधना विधी-विधान:-

साधना शुक्ल पक्ष के प्रथम दिवस पर रात्री मे 9 बजे प्रारंभ करे। साधना 11 दिन का है और 12 वे दिन चमेली के तेल से 100 माला मंत्र का आहुति भी देना है। इस साधना मे वस्त्र-आसन लाल ही रंग के होने चाहिए। माला रुद्राक्ष का हो और नित्य 100 माला जाप करना पडेगा । साधना काल मे 51 माला के बाद आप आराम कर सकते है परंतु उसके बाद बाकी मंत्र जाप करना होगा। मंत्र जाप के समय एक ताम्बे के कटोरे मे चमेली का तेल भरकर सामने रखना है और मंत्र जाप करते समय कटोरे मे भरकर रखे हुए तेल के तरफ देखकर जाप करें। तो कुछ दिनो बाद तेल मे मातंगी जी का चेहरा दिखाई देगा,उसके बाद जब मातंगी जी पुर्ण रुप मे दिखाई दे तो समज जाये “आपका साधना सफल हो गया है “,इस तरहा से साधना पुर्ण होता है। साधना सिद्धि के बाद आप कभी भी प्रयोग करके जो देखना चाहते हो वह देख सकते हो ।

मंत्रः-

।। ॐ ह्रीं क्लीं हूं तैलं मातंग्यै इच्छितं दर्शय दर्शय फट् स्वाहा।

om hreem kleem hoom teilam maatangyei darshay darshay phat swaahaa

साधना मे जो तेल इस्तेमाल किया हो उसे किसी कांच के बोटल मे सम्भालकर रखे,वह तेल प्रयोग करते समय काम मे आयेगा। हो सके तो साधना मे पुर्ण सफलता हेतु तेल मातंगी यंत्र को गले मे धारण करे ।